बच्‍चों के लिए मां का दूध बना जहर, बरते यह सावधानी

नीरज आंनद, बरेली (1 फरवरी): मां के दूध को बच्चो के लिए अमृत के बराबर माना गया है, लेकिन अब पता चला है कि मां के दूध में भी खतरनाक केमिकल पहुंच चुका है। एक रिसर्च में मां के दूध में 'लेड' नाम के घातक केमिकल का पता चला है। यह केमिकल बच्चों को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकता है।

पर्यावरण से छेड़छाड़ और बढ़ते प्रदूषण का खतरनाक असर अब मां के दूध तक जा पहुंचा है। नवजात बच्चों के लिए अमृत माना गया मां का दूध भी अब जहरीला हो रहा है। एक रिसर्च में मां के दूध में लेड जैसे खतरनाक केमिकल की बात सामने आई है। ये लेड आम बैटरियों में पाया जाता है। ये पेट्रोल के जहरीले धुंए में भी मौजूद होता है। ये लेड कितना खतरनाक है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शरीर में मौजूद लेड कई गंभीर बिमारियों की वजह बन सकता है। डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खून में लेड की मात्रा 10 माइक्रो ग्राम प्रति डेसी लीटर से ज्यादा होने पर ये खतरनाक केमिकल।

बच्‍चों को हो सकती हैं यह बीमारियां: बच्चों में किडनी की बीमारियों को जन्म दे सकता है। इससे बच्चों की सुनने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। ये मासूमों के शारीरिक विकास पर भी असर डालता है। ज्यादा लेड से बच्चों में सीखने की क्षमता प्रभावित होती है। लेड से बच्चों में असामान्य व्यवहार नजर आ सकता है। इससे मासूमों को दांतों की कई बीमारियां भी हो सकती है।

लेड न्यूरो टॉक्सिक होता है, जो सबके लिए नुकसानदेह है। इसकी मात्रा बढ़ने पर नर्वस सिस्टम पर भी असर पड़ सकता है। सबसे खतनाक बात ये है कि इंसानों की खुदगर्जी ने इस खतरे को जन्म दिया है। लेड जैसे घातक केमिकल का प्रदूषण हमारे हर ओर मौजूद है, इससे बचना मुश्किल है।

बीमारी के मुख्‍य कारण: सड़क पर गाड़ियों ने निकला धुंआ। कम बिजली वाले इलाकों में जेनरेटर का धुंआ। आम इस्तेमाल के काम आने वाला पेंट। लोगों के घरों में मौजूद इन्वर्टर।

वातावरण में लेड का जहर घोलने वाली कई चीजें हमारे आसपास ही मौजूद हैं। मां के दूध में लेड की मौजूदगी जांचने के लिए परीक्षण उत्तर प्रदेश के बरेली की एक लैब में किया गया। साल 2014 में किए गए इस रिसर्च के नतीजे बेहद चौकाने वाले थे। ट्रैफिक के बीच रहने वाली महिलाओं के दूध में लेड का प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पाया गया। जो सांस के जरीए इन महिलाओं के दूध तक पहुंचा। घरों में मौजूद आम इन्वर्टर की बैटरियों से भी 70 फीसदी लेड पैदा होता है।

बताया जा रहा है कि ये रिसर्च सड़क के किनारे रहने वाली 120 महिलाओं पर किया गया। रिसर्च के बाद इन महिलाओं के दूध में लेड की मात्रा पाई गई है। परीक्षण में जुटे डॉक्टर अब इस बात का पता लगाने में जुटे हैं कि लेड जैसे खतरनाक जहर की कितनी मात्रा मां के दूध में पहुंच चुकी है।