इस फॉर्मूले से मरने के बाद भी ज़िंदा होगा इंसान!

नई दिल्‍ली (30 जनवरी): विज्ञान मौत को खुला चैलेंज दे रहा है। दुनिया के कई देशों में मरने के बाद इंसान को जिंदा करने की कोशिश में लगे हुए हैं वैज्ञानिक। जी हां, अमेरिका में इत्तेफाकन कुछ ऐसा हुआ जिससे वैज्ञानिकों के उस फॉर्मूले को और बल मिल गया जिस पर पहले से ही काम चल रहा था।

अमेरिका और रूस के वैज्ञानिक इस कोशिश में लगे हुए थे कि कैसे डीप फ्रीज़ के ज़रिए मृत शरीर में जान फिर से फूंकी जा सके। इसी बीच अमेरिका का रहने वाला एक युवक 12 घंटे बर्फ में दबा रहने के बाद दोबारा ज़िंदा हो गया। ये युवक एक सड़क हादसे में बर्फ के नीचे दब गया था। उसकी धड़कन रुक गई थी, सांसें बंद हो गई थीं लेकिन एक साल तक कोमा में रहने के बाद इसे दोबारा ज़िंदगी मिली।

जिस तकनीक के ज़रिए इंसान के शरीर में दोबारा जान फूंकने की कोशिश हो रही है उसका नाम है क्रायोनिक्स प्रीजरवेशन। करीब तीस साल से ज़्यादा से इस तकनीक पर काम किया जा रहा है। अमेरिका और रूस की कई कंपनियां मृत शरीर को माइनस 196 डिग्री तापमान में रख कर रिसर्च में लगी हुई हैं। वैज्ञानिकों ने इस फॉर्मूले को एक कीड़े पर प्रयोग किया है, जिसे 30 साल बाद ज़िंदा किया गया।

पुनर्जन्म पर भले ही कोई विश्वास करे या ना करे, लेकिन वैज्ञानिक जिस खोज में लगे हुए हैं वो हैरान करने वाला है। हिदुस्तान में भी इस फॉर्मूले के सहारे कुछ लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं। जालंधर के नूरमहल में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज को दो साल पहले 'क्लिनिकली डेड' घोषित किया चुका है। उनके शरीर को डीप फ्रीज़र में रखा गया है, लेकिन भक्तों को उम्मीद है कि आशुतोष महाराज दोबारा ज़िंदा हो सकते हैं। इसीलिए भक्तों ने उनका अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया है।

देखिए पूरी रिपोर्ट:

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