फिर विवादों में हेमा मालिनी, तुड़वाई थीं मैंग्रोव की झाड़ियां

मुंबई(3 फरवरी): बीजेपी सासंद हेमा मालिनी एक बार विवादों में हैं। मात्र 70 हजार रुपए में हेमा की संस्था को मुंबई के अंधेरी इलाके में 2000 वर्ग मीटर का सरकारी प्लॉट अलॉट किया गया। लेकिन असल में उन्हें इससे पहले वर्सोवा इलाके में पिछली सरकार ने प्लॉट अलॉट किया था। उसमें पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील मैंग्रोव की झाड़ियां होने की वजह से वे अपनी नाट्य-संगीत संस्था का निर्माण नहीं करा पाईं। इसी विवादित मामले में यह सनसनीखेज खुलासा हो रहा है कि हेमा की संस्था ने पिछले प्लॉट पर मैंग्रोव कटवाए थे।

आरटीआई ऐक्टिविस्ट अनिल गलगली के मुताबिक तहसीलदार ने बकायदा मैंग्रोव काटे जाने की जांच रिपोर्ट दी थी। इसी को आधार बनाते हुए मुंबई उपनगर के कलेक्टर ने हेमा मालिनी को नोटिस देकर 10 दिनों के भीतर सफाई मांगी थी। साथ ही जमीन का अलॉटमेंट कैंसिल करने की धमकी भी दी थी। बताया जाता है कि हेमा ने इस नोटिस का जवाब तक नहीं दिया और नई बीजेपी सरकार ने उन्हें वर्सोवा में नया प्लॉट अलॉट कर दिया। खेल के मैदान के लिए आरक्षित 50 हजार वर्ग मीटर के प्लॉट पर पहले आरक्षण हटाया गया। फिर इसके टुकड़े बांटे गए। हेमा की संस्था को भी इसी में 2000 वर्ग मीटर का प्लॉट अलॉट किया गया है। हेमा का तर्क है कि सभी नियमों का पालन करने के वाद यह अलॉटमेंट किया गया है।

इस बार पुरानी जमीन के अलॉटमेंट को लेकर नई पेचीदकियां सामने आई हैं। वर्सोवा की इसी जमीन को लेकर, मुंबई उपनगर जिलाधिकारी ने दिनांक 28/8/1998 को हेमा मालिनी को नोटीस भेजी थी। नोटीस में 'कोस्टल रेगुलेशन जोन' (सीआरजेड) के प्रावधान का उल्लंघन करने पर जमीन के लिए जारी किया गया उद्देश्य पत्र रद्द करने की चेतावनी दी गई थी। इसके अलावा, मामले में और भी गड़बड़ियां गिनवाई गई थीं। उन्हें वर्सोवा के सर्वे नंबर 161 समीप की खाड़ी जमीन पर 1741.89 वर्ग मीटर क्षेत्र का कब्जा दिया गया।

सबसे बड़ी गड़बड़ यह कि हेमा ने इसके बाद जो प्रॉजेक्ट रिपोर्ट पेश की, उसमें जमीन पर 30,600 वर्ग मीटर का निर्माण करने का इरादा दिखाया। कलेक्टर ने नोटिस में साफ कहा की प्रॉजेक्ट रिपोर्ट में उपलब्ध जमीन 50 हजार वर्ग मीटर दर्शाई गई है, इतनी 'तफावत मंजूर नहीं होगी'। संस्था के पास उपलब्ध पैसे पर भी कलेक्टर ने सवाल उठाए थे। सांताक्रुज स्थित समता सहकारी बैंक में रु 22.50 लाख का बैलेंस होने का प्रमाणपत्र पेश किया था। जबकि प्रॉजेक्ट खर्च रु 3.70 करोड़ होने का दावा किया था। कलेक्टर न यह सबूत मांगा था कि प्रॉजेक्ट की कुल 25% पूंजी संस्था के अकाउंट में जमा है।

गलगली ने इस मामले में नोटिस देने के बाद कार्रवाई न करने वाले कलेक्टर कार्यालय के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया है कि कोस्टल रेगुलेशन जोन की नियमावली का उल्लंघन करने के बाद जारी नोटिस का जवाब तक नहीं दिया गया। इसके बावजूद सरकार ने पुराने कागजात की पड़ताल के बिना उन्हें दोबारा नई जमीन अलॉट कैसे कर दी? उन्होंने मांगी की है कि इसका जांच होनी चाहिए।