'भारत माता की जय' में कुछ भी गैर-इस्लामी नहीं : मुस्लिम राष्ट्रीय मंच

नई दिल्ली (6 अप्रैल): मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का कहना है कि वे 'भारत माता की जय' नारे के पक्ष में बातचीत करने और एक प्रस्ताव पास करने के लिए तैयार हैं। ऐसा नागपुर में इस महीने अंत में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी में किया जाएगा। यह संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का मुस्लिम फ्रंट है।

अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' की रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कन्वीनर मोहम्मद अफजल ने बताया, "16 से 18 अप्रैल तक हमारी राष्ट्रीय कारिणी का कार्यक्रम है। जिसमें देश भर के प्रतिनिधि शामिल होंगे। हम भारत माता की जय पर होने वाली अनावश्यक विवाद पर चर्चा करेंगे। साथ ही हम अपने नजरिए का प्रसार करने के लिए एक प्रस्ताव पास करेंगे।"

अफजल ने कहा, "इस नारे में कुछ भी गैर-इस्लामी नहीं है। मुस्लिमों को भी यह नारा लगाना चाहिए।" इस्लामिक संस्था दारुल उलूम देवबंद के फतवे के नजरिए के खिलाफ जाते हुए अफजल ने कहा कि यह नारा मदरलैंड को सलाम करता है। जो कि इसकी "पूजा करने" के समान नहीं है। 

गौरतलब है, हाल ही में देवबंद ने कहा था कि मुस्लिम 'भारत माता' से प्यार करते हैं। लेकिन वे अपनी मादर-ए-वतन की पूजा नहीं कर सकते। क्योंकि यह विचार मोनोथीज्म़ (एकेश्वरवाद) के इस्लामी विचार के खिलाफ है।

अफजल ने कहा, "भारत माता की जय कहने का उर्दू में मतलब हुआ मादर-ए-वतन हिंदुस्तान जिंदाबाद। यह कहीं नहीं कहता कि मुस्लिमों को राष्ट्र की पूजा करनी चाहिए। और मदरलैंड को जिंदाबाद सभी मुस्लिमों का कहना चाहिए। इस्लाम अपने आप में राष्ट्र से प्यार करने के लिए हमारे साथ है।"

वरिष्ठ आरएसएस नेता इंदरेश कुमार मंच का दिशानिर्देशन करते रहे हैं। जो तकनीकी तौर पर संघ परिवार से बाहर है। लेकिन यह ऐसी संस्था है जो संघ के विचार से जुड़ा हुआ है।