नोटबंदी पर सड़क से संसद तक संग्राम

नई दिल्ली (18 नवंबर): 500 और 1000 के नोटों पर पाबंदी से देशभर में कैश के लिए कोहराम मचा है। कैश के लिए भारी तादद में लोग बैंक, एटीएम और पोस्ट ऑफिस के बाहर घंटों-घंटों कतार में खड़े होने को मजबूर है। वहीं इस मुद्दे पर सियासी संग्राम भी जारी है। तमाम पार्टियां अपने सियासी फायदे नुकसान के हिसाब से सियासत करने में जुटी है। बीजेपी और उसके सहयोगी जहां पीएम मोदी के नोटबंदी के फैसले को देश के विकास के लिए 'रामवाण' बता रहे हैं वहीं विपक्ष नोटबंदी से जनता हो रही परेशानी का हवाला दे रहे हैं। 

इस मुद्दे पर आज भी लोकसभा और राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ। हंगामे की वजह से दोनों सदनों की कार्रवाही कई बार स्थगति करनी पड़ी, बाद में दोनों सदनों की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। शुक्रवार को जब संसद की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्षी कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्षी सदस्य संसद में नोटबंदी के मुद्दे पर चर्चा के साथ मतविभाजन भी चाहते हैं लेकिन सरकार नियम 193 के तहत चर्चा कराने को तैयार है। दूसरी ओर बीजेपी के सदस्यों ने गुलाम नबी आजाद के नोटबंदी वाले के लिए माफी की मांग कर रहे थे। राज्यसभा और लोकसभा की कार्यवाही दिनभर नहीं चली। 

गुरुवार से सदन में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के बयान पर भी आज संसद में जमकर हंगामा हुआ, वहीं बीजेपी सड़कों पर भी गुलाम नबी आजाद के खिलाफ मोर्चा खोला। भारी तादाद में बीजेपी के नेता और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में गुलाम नबी आजाद के खिलाफ प्रदर्शन किया। गौरतलब है कि गुरुवार को गुलाब नबी आजाद ने नोटबंदी की तुलना आतंकी हमलों से की थी जिसका सत्ता पक्ष के सदस्यों ने विरोध किया।