जियो से डरकर कंपनियों ने सरकार को लिखी चिट्ठी

नई दिल्ली (7 सितंबर): रिलायंस के धमाकेदार 4जी इंटरनेट की घोषणा करने के बाद टॉप टेलिकॉम कंपनियों की तरफ से पीएमओ को चिट्ठी भेजी गई है। कंपनियों ने कहा है कि इंटरकनेक्शन पॉइंट्स के लिए रिलायंस जियो इंफोकॉम के अनुरोध पर कदम उठाने का कोई दायित्व उन पर नहीं बनता है। जियो के वॉइस ट्रैफिक को टर्मिनेट करने के लिए उनके पास न तो नेटवर्क है और न ही वित्तीय संसाधन।

सेल्युलर ऑपरेटर्स असोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने पीएमओ में प्रिंसिपल सेक्रटरी नृपेंद्र मिश्रा को एक महीने में दूसरा लेटर भेजा है। लेटर में कहा गया, 'रिलायंस जियो के 10 करोड़ कस्टमर्स (संभावित) के इनकमिंग वॉइस ट्रैफिक को अनलोड करने से मौजूदा ऑपरेटरों का वेटेड औसत वॉइस रियलाइजेशन 30-40 पैसे प्रति वॉइस मिनट से घटकर 22-25 पैसे प्रति वॉइस मिनट या इससे भी नीचे चला जाएगा।'

सीओएआई ने लेटर में आगाह किया है कि वेटेड ऐवरेज वॉइस रियलाइजेशन में ऐसी कमी आने से काफी पहले ही मौजूदा टेलिकॉम कंपनियों की 'हालत खस्ता' हो जाएगी। सीओएआई के डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यूज ने कहा, 'रिलायंस जियो वॉइस सर्विसेज पर इतनी बड़ी छूट का असर कुछ हद तक डेटा से होने वाली आमदनी और कस्टमर्स की बड़ी संख्या जोड़ने से कर सकती है। यह बिल्कुल साफ हो गया है कि इस फ्री सर्विस का बड़ा बोझ टैरिफ मैन्युपुलेशंस के जरिए प्रतिद्वंद्वी ऑपरेटरों पर डालने की कोशिश हो रही है। ऐसे वॉइस ट्रैफिक की सुनामी से फाइनैंशल कॉम्पिटिशन खत्म हो जाएगा।'

उन्होंने कहा कि मौजूदा टेलिकॉम कंपनियों को ऐसा वॉइस ट्रैफिक संभालने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जो उनके मौजूदा स्तरों का दोगुना होगा। इससे पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने प्रतिद्वंद्वी मौजूदा ऑपरेटरों से कहा था कि वे पर्याप्त पॉइंट ऑफ इंटरकनेक्शन मुहैया कराएं ताकि जियो के कस्टमर्स आसानी से कॉल्स कर सकें।