'घर वापसी के लिए कश्मीरी पंडितों से कोई मिन्नत नहीं करेगा'

नई दिल्ली (20  जनवरी) :  जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीरी पंडितों की घर वापसी को लेकर विवादित बयान दिया है। फारूक ने कहा कि 'उन्हें इस बात का अहसास करना होगा कि कोई भीख का कटोरा लेकर उनके सामने आकर यह नहीं कहेगा कि आओ और हमारे साथ रहो, उन्हें कदम उठाना होगा।'

बीते 26 साल से कश्मीरी पंडितों को अपना घर छोड़कर देश में अन्यत्र विस्थापितों की तरह रहना पड़ रहा है।

फारूक अब्दुल्ला ने इस मुद्दे पर एक किताब का विमोचन करते हुए कहा कि दिल्ली में अपने घर बना चुके कई कश्मीरी पंडितों ने उस समय उनसे आकर मुलाकात की थी, जब जम्मू-कश्मीर सरकार ने उनसे घाटी में लौटने को कहा था।

अब्दुल्ला ने कहा, 'जब सरकार ने यह पहल की कि यहां बस चुके अधिकारियों और डॉक्टरों को वापस घाटी लौटा आना चाहिए तो वे मुझसे मिलने आए और कहा - देखिए अब हमारे बच्चे यहां स्कूलों में पढ़ रहे हैं, हमारे माता-पिता बीमार हैं और उन्हें इलाज की जरूरत है। हम उन्हें पीछे छोड़कर नहीं आ सकते। इसलिए भगरवान के लिए हमें यहीं रहने दें।'

फारूक ने कहा कि अंतिम बंदूक के खामोश होने तक का इंतजार मत करिए, घर आइए। आप किसका इंतजार कर रहे हैं, इंतजार मत करिए, आप सोचते हैं कि फारूक अब्दुल्ला आएगा और आपका हाथ पकड़कर वहां ले जाएगा।'  फारूक ने कहा कि पहला कदम उठाने तक यह मुश्किल होगा, हां घर लौटने की जिम्मेदारी उनकी है।