भारत में यहां पर होती है दादी-पोते की शादी

नई दिल्ली (12 मई): भारत को विभिन्न संस्कृतियों का देश माना जाता है। जहां अलग-अलग धर्म के लोग मिल-जुल कर रहते हैं। लेकिन कुछ परंपराए ऐसी भी हैं जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे। एमपी में एक ऐसा समुदाय भी है, जहां की महिलाएं पति की मौत के बाद भी कभी विधवा नहीं होती। इसके लिए चाहे दादी को अपने पोते से और भाभी को अपने देवर से ही शादी क्यों न करनी पड़े।

बेहंगा में रहने वाले गोंड समुदाय में किसी विधवा को ढूंढ पाना लगभग नामुमकिन है। ऐसा इसलिए क्योंकि यदि इस समुदाय में किसी महिला के पति की मौत हो जाती है तो उसकी शादी घर के अगले कुंवारे लड़के से कर दी जाती है। ऐसे में यदि कोई महिला दोबारा शादी करने से इनकार कर दे तो उसे विशेष तौर पर तैयार किए गए चांदी के कड़े दिए जाते हैं, जिसके बाद उसे वापस शादीशुदा का दर्जा मिल जाता है और ये कड़े जिसने महिला को सौंपे हैं वो ही फिर उसकी पूरी जिम्मेदारी उठाता है।

इतना ही नहीं इस तरह की शादी में दादा की मौत के बाद दादी से शादी करने पर पोते को ही घर का मुखिया माना जाता है, फिर चाहे उसके पिता जिंदा हों या नहीं। हालांकि, परंपरा के अनुसार भले ही नाबालिग को अपनी दादी से शादी करनी पड़े, लेकिन उसे बालिग होने पर दूसरी शादी करने की भी छूट रहती है, पर जब तक पहली पत्नी बन चुकी दादी की मौत नहीं हो जाती तब तक उसकी नई पत्नी को दूसरी पत्नी का दर्जा ही प्राप्त रहता है। इस तरह की शादी में उम्र में बड़े अंतर के कारण किसी प्रकार का शारीरिक संबंध नहीं होता है। लेकिन यदि होता भी है तो उसे भी गोंड समाज में गलत नहीं माना जाता।