हरियाणा: स्कूलों में 7,000 छात्राओं के पास 'शौचालय' की सुविधा ही नहीं

नई दिल्ली (25 जून): हरियाणा के स्कूलों में पढ़ रही करीब 7,000 छात्राओं के पास शौचालय की सुविधा ही नहीं है। इनके लिए बुनियादी सुविधा के नाम पर या तो बंद पड़े शौचालय हैं जो काम ही नहीं करते या फिर शौचालय नाम की कोई सुविधा ही नहीं है। नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से कराए गए सर्वे के आंकडो़ में ये तथ्य सामने आए हैं। 

'हिंदुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में सामने आया है कि राज्य के 85 स्कूलों में (जिनमें केवल लड़कियों के स्कूल और को-एजुकेशन स्कूल शामिल हैं) शौचालय की सुविधा ही नहीं है। जबकि, 51 स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय बनाए तो गए हैं। लेकिन वे उपयोग करने की हालत में नहीं है। 

अगर जिलों की बात की जाए, तो मेवात सूची में सबसे ऊपर है। यहां 14 स्कूलों में लड़कियो के लिए कोई शौचालय नहीं है। इसके बाद पानीपत का स्थान आता है, जहां 10 स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 22,000 से ज्यादा स्कूलों में लड़कियों के लिए बनाए गए 2,546 शौचालय काम करने की हालत में नहीं है। 7,000 छात्राओं के अलावा ये समस्या 250 महिला अध्यापकों के साथ भी है। जो इन स्कूलों में पढ़ाती हैं।

इसके अलावा राज्य के 4,500 स्कूलों में जहां छात्रों के लिए शौचालय की सुविधा तो है। लेकिन हाथ धोने की सुविधा नहीं है। हालांकि, राज्य पिछले साल की तुलना में काफी सुधार हुआ है। पिछले साल 419 लड़कियों के स्कूलों मे शौचालय की सुविधा नहीं थी। जो संख्या घटकर 85 स्कूल तक रह गई है। 

राज्य के स्कूलों में तकनीकी स्टाफ और नेतृत्व की कमी भी महसूस की जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 17,000 स्कूल बिना हेडमास्टर के संचालित हो रहे हैं। यह संख्या पिछले साल से इस संख्या में 600 की बढ़ोतरी हुई है।इसके अलावा राज्य के 188 स्कूलों में एक भी अध्यापक नहीं है। इसके अलावा 1,075 स्कूलों में केवल एक ही अध्यापक है।