अपना विवाह क़ानून नहीं होने से पाकिस्तान में हिंदुओं को भारी परेशानी

 

इस्लामाबाद (29 जनवरी) :  पाकिस्तान में लाखों हिंदुओं के लिए शादी का कोई क़ानून नहीं है, इस क़ानूनी खामी की वजह से पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं, खास तौर पर महिलाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।  

पाकिस्तान के अग्रणी अखबार 'डान'  ने शुक्रवार को 'हिंदू मैरिज बिल' नाम से संपादकीय में इस मुद्दे को उठाया  है। संपादकीय में कहा गया है कि देश के कुछ नेता अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर बयानबाज़ी में कोई कसर नहीं छोड़ते, लेकिन जब उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए वास्तविक तौर पर कदम उठाने का सवाल है तो कुछ होता नहीं दिखाई देता। इसका ज्वलंत उदाहरण है पाकिस्तान में हिंदू विवाह के लिए क़ानून के मुद्दे का दशकों से लटका होना।      

सरकारी कामकाज में दिक्कत अखबार ने लिखा कि मौजूदा वक्त में पाकिस्तान में रहने वाले लाखों हिंदुओं के लिए कोई विवाह कानून नहीं हैं। इसकी वजह से हिंदू महिलाओं को सरकारी कामकाज के लिए अपने रिश्ते साबित करने में अनेक दिक्कतो का सामना करना पड़ता है। ऐसी हिंदू महिलाएं जिनके पतियो की मौत हो चुकी है, उनके लिए तो और बड़ी परेशानी है।

नहीं खोल सकते बैंंक खाता  

रिश्ते के आधिकारिक सबूत के बिना सरकारी दस्तावेज को प्राप्त करना टेढ़ी खीर से कम नहीं। बैंक खाता खोलने से लेकर वीज़ा के लिए आवेदन देना, ऐसे में किसी भी नागरिक के लिए असंभव हो जाता है।

ज़बरन धर्मांतरण की एक वजह अखबार ने आश्चर्य जताया कि ऐसे में हिंदू समुदाय किस तरह ऐसी स्थितियों से निपटता होगा।कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदू शादियों के लिए आधिकारिक दस्तावेज की कमी भी जबरन धर्मांतरण की वजह बनता है।

इस तरह के कई मुद्दे बुधवार को इस्लामाबाद में एक सेमिनार में उठाए गए। इन्हें विधि और क़ानून पर पाक संसद की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन ने उठाया। इसी कमेटी को संसद मे रखे गए हिंदू मैरिज बिल को अनुमोदन देना है। चेयरमैन कमेटी के सदस्यों को उसी दिन हुई एक बैठक में हरी झंडी देने के लिए समझाने में नाकाम रहे।

यहा तक कि पाकिस्तान का सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले में क़ानून बनाने का आदेश दे चुका है, लेकिन सांसदों की ओर इस दिशा में कोई गंभीर पहल नहीं की जा रही है।