'आतंकवाद पर पाकिस्तान से कोई समझौता नहीं किया जायेगा'

नई दिल्ली (5 मार्च): सार्क के नए महासचिव के समर्थन, पाकिस्तान के मछुआरों की रिहाई और लाहौर में इस माह के आखिर में होने वाली सिंधु आयोग की बैठक में सिंधु आयुक्त को भेजने के भारत के फैसलों से ऐसा लग रहा है कि दोनों देशों के बीच रिश्तों की कड़वाहट कुछ कम हो रही है, लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि हालांकि भारत, पाक से बातचीत के लिए आतंक से समझौता नहीं करेगा। पाकिस्तान के बीच रिश्तों की तल्खी में आतंकवाद अभी भी मुख्य मुद्दा बना रहेगा। इसी बीच भारत ने राबी नदी पर लगभग एक दशक से रुके बांध के काम को फिर से शुरु करने के आदेश दे दिये हैं। पाकिस्तान ऐसे बांधों पर आपत्ति करता आया है, लेकिन भारत ने भी स्पष्ट कर दिया है कि अपनी जरूरते पूरा करने के लिए वो किसी भी नदी पर बांध बनाने के लिए स्वतंत्र है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी गतिविधियों पर नजर रखे रहेगा और इसी के आधार पर वह अपने अगले कदम पर फैसला लेगा। सीमा के ऊपरी इलाकों में बर्फ पिघलने के साथ-साथ भारत पाकिस्तान के आतंकवादियों द्वारा घुसपैठ और घाटी में अशांति फैलाने के उसके प्रयासों पर नजरें बनाए रहेगा।

बीते साल घाटी में कई उग्र प्रदर्शन हुए जिनके पीछे सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान की शह थी। इसके साथ ही पिछले साल भारत को पठानकोट, उरी और नागरोटा में आतंकवादी हमले झेलने पड़े थे। इन आतंकवादी हमलों में भी पाकिस्तानी कनेक्शन सामने आया था।

सिंधु जल समझौते पर भारत पहले ही विश्व बैंक के रुख का विरोध कर चुका है। विश्व बैंक के दखल पर गुस्साए भारत ने उस पर पाकिस्तान का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए जल समझौते पर मध्यस्थता प्रक्रिया में हिस्सा लेने से ही इनकार कर दिया था। तब जाकर विश्व बैंक ने यह मसला सुलझाने के लिए निष्पक्ष विशेषज्ञ नियुक्त करने की भारत की मांग मानी थी। इसके बाद भारत ने सिंधु आयोग के आयुक्तों की मीटिंग लाहौर में रखने पर भी आपत्ति जताई थी।