निर्दोष लोगों के हत्यारों को जमानत या परोल नहीं मिलेगी- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली (20 फरवरी): निर्दोष लोगों की हत्या करने वालों  को अंतरिम जमानत या परोल नहीं दी जा सकती। यह सख्त सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने की है। दिल्ली के लाजपत नगर में 21 मई, 1996 को हुए बम धमाके के सजायाफ्ता कैदी मोहम्मद नौशाद की अंतरिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस खेहर ने उपरोक्त टिप्पणी की। 

नौशाद ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर अपनी बेटी की शादी में शामिल होने के लिए एक महीने के लिए अंतरिम जमानत की याचिका दाखिल की थी। इस मामले में कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी। सोमवार को हुई सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश खेहर की बेंच ने अंतरिम जमानत देने से इंकार करते हुए कहा कि निर्दोष लोगों की जान लेने वाले आतंकी को पारिवारिक जरूरतों के लिए भी अंतरिम जमानत परोल नहीं मिलेगा। कोर्ट ने कहा कि बेहतर है कि वे परिवार से रिश्तों को भूल जाएं। नौशाद को 14 जून, 1996 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उसके पास से विस्फोटक भी बरामद हुए थे।