मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, नालायक कर्मचारियों का नहीं होगा इंक्रीमेंट

नई दिल्ली (26 जुलाई): मोदी सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ऐलान किया है कि सरकारी विभागों में काम नहीं करने वाले कर्मचारियों के वेतन में सालाना बढ़ोत्तरी नहीं की जाएगी। अब कर्मचारियों को प्राइवेट कंपनी की ही तरह परफॉर्मेंस बेस्ड इन्क्रिमेंट देने की बात कही गई है।

सातवें वेतन आयोग की अधिसूचना को लागू करने के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि प्रमोशन और इन्क्रिमेंट के लिए बेंचमार्क को 'गुड' से बढ़ाकर 'वेरी गुड' कर दिया गया है। अब वेरी गुड श्रेणी में आने वाले कर्मचारियों को ही वार्षिक वेतन बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा।

मोडिफाइड अशुअर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) स्कीम पहले की ही तरह जारी रहेगी। इसमें 10, 20 और 30 साल की सर्विस के पुराने पैटर्न को बदला नहीं गया है। सातवें वेतन आयोग को लागू करने के आदेश में कहा गया कि ऐसे कर्मचारी जो MACP या सर्विस के पहले 20 साल के दौरान रेग्युलर प्रमोशन के बेंचमार्क तक नहीं पहुंच पाते उनका ऐनुअल इन्क्रिमेंट रोक दिया जाएगा।

सरकार के मुताबिक ऐसी आम धारणा है कि कर्मचारी MACP ग्रांट को हल्के में लेते हैं। इसका असर कर्मचारियों के प्रदर्शन पर पड़ता है। ऐसे में आयोग ने इस बात का निर्णय लिया है कि जिन कर्मचारियों का प्रदर्शन बेहतर नहीं है, उन्हें भविष्य में ऐनुअल इन्क्रिमेंट नहीं दिया जाना चाहिए। सरकार ने इसे मान लिया है।

इससे पहले आज ही मोदी सरकार ने लाखों कर्मचारियों को खुशखबरी देते हुए सातवें वेतन आयोग को मंजूरी देने से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी है। जिसके तहत अब अगस्त से लाखों कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। सरकार के कर्मचारियों को अगस्त माह से संशोधित सैलरी मिलेगी। सातवें वेतन आयोग के लागू होने के बाद से केंद्र सरकार के 33 लाख कर्मचारी, 14 लाख सशस्त्र बलों के कर्मी और 52 लाख पेंशनरों को लाभ मिलेगा।