सुपुर्द ए-खाक हुए नेताजी के ड्राइवर कर्नल निजामुद्दीन

आजमगढ़ (7 फरवरी): नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के भरोसेमंद सहयोगी और उनके ड्राइवर कर्नल निजामुद्दीन को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया है। सोमवार तड़के करीब चार बजे 117 साल की उम्र में  कर्नल निजामुद्दीन का निधन हो गया था। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे।

कर्नल निजामुद्दीन उप्र के आज़मगढ़ के मुबारकपुर स्थित ढ़कवा गांव के रहने वाले थे। वे नेताजी के बेहद विश्वसनीय अंगरक्षक रहे थे। वे पूरे दस सालों तक नेताजी के साथ उनके अहम गतिवधियों के दौरान उनके साथ रहे। वे विभिन्न राष्ट्रों के शासकों, सेनानायकों और जर्मनी के तानाशाह हिटलर जैसे विशिष्ट व्यक्तियों की नेताजी से मुलाकात के दौरान भी उनके साथ रहे। उनके भरोसेमंद ड्राइवर के रूप में भी उनके साथ रहे।

कर्नल निजामुद्दीन करीब 24-25 साल की उम्र में अपनी मां को बिना बताए ही अपने पिता के पास सिंगापुर चले गए थे। सिंगापुर में ही वे केंटीन में काम करते रहे। इसी दौरान उन्हें आजाद हिन्द फौज के लिए नौजवानों की भर्ती की जानकारी मिली और वे इस फौज का अहम हिस्सा बन गए।

इसके बाद उन्होंने टोकियो, जापान, नागासाकी, हिरोशिमा, वियतनाम, थाईलैण्ड, कम्बोडिया, मलेशिया का दौरा भी नेताजी के साथ किया और विभिन्न गोपनीय प्रोजेक्ट का हिस्सा रहे।

कर्नल निजामुद्दीन के मुताबिक 18 अगस्त 1945 को जिस समय नेताजी के मौत की खबर रेडियो पर चली, उसे वह नेताजी के साथ ही बैठकर वर्मा के जंगल में सुन रहे थे। इसके बाद उन्होंने 20 अगस्त 1947 को नेताजी को बर्मा में छितांग नदी के पास आखिरी बार नाव पर छोड़ा था। इसके बाद उनकी नेताजी से मुलाकात नहीं हुई।

2014 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान तब के भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी रहे नरेंद्र मोदी ने कर्नल के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया था।