नीतीश ने फिर उठाई मांग, जाति आधारित जनगणना आंकड़े हों सार्वजनिक

नई दिल्ली (24 जून): बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को फिर से अपनी मांग को दोहराते हुए कहा कि जाति आधारित 2011 की जनसंख्या के आंकड़ों को सार्वजनिक किया जाए। जिससे कि जो भी विकास के मामले में पीछे हैं उनका सशक्तीकरण किया जा सके।

'द ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने सामाजिक आंकड़ों के एक सम्मेलन में कहा, "लोगों को इसे जानने का हक है। हर जाति को अपनी जनसंख्या और दूसरी बातों के साथ इसकी ताकत और कमजोरियां जानना चाहिए।" यह सम्मेलन थिंकटैंक एशियन डेवलेपमेंट रीसर्च इंस्टीट्यूट की तरफ से आयोजित किया गया था।

इस सम्मेलन का उद्घाटन उप-राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने किया। नीतीश कुमार ने कहा कि जनसंख्या के सभी वर्गों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए असली सूचनाएं सार्वजनिक की जानी चाहिए।

जाति आधारित जनसंख्या के आंकड़े कई तरह के मिथकों का खंडन कर देंगे। जो पिछड़े और हाशिए पर पहुंच चुके लोगों के विकास के बार में सही तस्वीर पेश करेंगे। साथ ही उनकी तरक्की के लिए योजनाएं बनाने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी जिक्र किया कि जाति आधारित 2011 की जनसंख्या के आंकड़े 1931 के बाद के पहले आंकड़े हैं।