नीतीश कुमार ने खोला राज़, इनके कहने पर प्रशांत किशोर को JDU में किया शामिल

न्यूज24 ब्यूरो, नई दिल्ली (16 जनवरी): बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज से पर्दा उठाते हुए बताया की उन्होंने किसके कहने पर प्रशांत किशोर को पार्टी में शामिल किया। ये सवाल सबके मन में था कि आखिर नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को जेडीयू में किसके कहने पर शामिल किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार की रात इसका जवाब दिया। नीतीश कुमार ने बताया कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को जद(यू) में शामिल कर लेने का दो बार सुझाव दिया था। नीतीश कुमार ने एक निजी समाचार चैनल के कार्यक्रम में चुनाव रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर को अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर देखने से जुड़े सवाल पर यह बात कही।

बता दें, प्रशांत किशोर को पिछले साल सितंबर में जद (यू) में शामिल किया गया था और कुछ ही हफ्ते बाद उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया गया था। इससे ऐसी अटकलें लगने लगी कि नीतीश कुमार उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने के बारे में सोच रहे हैं। नीतीश कुमार ने कहा, 'वह हमारे लिये नए नहीं हैं. उन्होंने हमारे साथ 2015 के विधानसभा चुनाव में काम किया था, थोड़े समय के लिये वह कहीं और व्यस्त थे.कृपया मुझे बताने दें कि अमित शाह ने मुझे दो बार किशोर को जद (यू) में शामिल करने को कहा था।' उन्होंने कहा, "प्रशांत किशोर को समाज के सभी तबके से युवा प्रतिभाओं को राजनीति की ओर आकर्षित करने का काम सौंपा गया है. राजनीतिक परिवारों में नहीं जन्मे लोगों की राजनीति से पहुंच दूर हो गई है। "

नीतीश कुमार ने इस कार्यक्रम में अपने उत्तराधिकारी के बारे में सवाल पूछे जाने पर जवाब दिया कि ये जनता तय करेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर को नियुक्ति भाजपा के दो शीर्ष नेताओं की सलाह पर की गई है। नीतीश कुमार ने कहा कि प्रशांत किशोर को उपाध्यक्ष बनाने के फैसले में उनके अलावा और भी कई लोग शामिल थे। प्रशांत किशोर को जब नीतीश कुमार में जदयू में शामिल किया तो तब एक कोशिश खुद प्रशांत किशोर की टीम और उनके द्वारा यह हुई कि उन्हें पार्टी में नीतीश कुमार के बाद दूसरे नंबर पर माना जाए।

नीतीश कुमार ने कहा, ‘प्रशांत किशोर को समाज के सभी तबके से युवा प्रतिभाओं को राजनीति की ओर आकर्षित करने का काम सौंपा गया है। राजनीतिक परिवारों में नहीं जन्मे लोगों की राजनीति से पहुंच दूर हो गई है। मुझे प्रशांत किशोर से काफी लगाव है। लेकिन, उत्तराधिकारी जैसी बातें हमें नहीं करनी चाहिये यह राजशाही नहीं है।'