नीतीश के इस्तीफे के बाद बिहार में संभावनाएं, जानें क्या हो सकता है अब

नई दिल्ली ( 26 जुलाई ): बिहार में बहुत बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। लंबी उठापटक के बाद बुधवार को जेडीयू सुप्रीमो नीतीश कुमार ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनके इस इस्तीफे के साथ ही जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस की 20 महीने पुरानी महागठबंधन सरकार का अंत हो गया। बिहार अब एक फिर से राजनीति के चौराहे पर है, जहां कई तरह की संभावनाएं आकार ले सकती हैं। 

सीटों के आंकड़े की बात करें तो 243 सदस्यीय विधानसभा में सबसे ज्यादा 80 सीटें लालू यादव की पार्टी आरजेडी के पास हैं। नीतीश की पार्टी जेडीयू के पास फिलहाल 71 सीटें हैं, जबकि महागठबंधन में तीसरी सहयोगी पार्टी रही कांग्रेस के पास 27 सीटें हैं। वहीं, मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के पास 53 सीटें हैं और उसकी सहयोगी पार्टी एलजेपी और आरएलएसपी के दो-दो विधायक हैं। जीतनराम मांझी की पार्टी 'हम' का एक विधायक है और भाकपा माले के खाते में तीन सीटें हैं, जबकि 4 निर्दलीय विधायक हैं। 


बिहार में ये हो सकती हैं संभावनाएं
-बिहार में सत्ता हासिल करने का जादुई आंकड़ा 122 है। जेडीयू के पास 71 सीटें हैं और बीजेपी की 53 सीटें मिला ली जाएं तो 124 सीटें हो जाती हैं। इससे सरकार को बहुमत मिल जाएगा। वहीं, बीजेपी की सहयोगी एलजेपी, आरएलएसपी और 'हम' जैसी पार्टियों की सीटों को मिला लें तो यह आंकड़ा 129 सीटों का होता है। यानी बीजेपी के साथ मिलकर नीतीश कुमार आसानी से सरकार चला सकते हैं।

-नीतीश कुमार ने इस्तीफा देकर 'सुशासन बाबू' की अपनी छवि को मजबूत करते हुए बड़ा दांव खेला है। ऐसे में यह भी संभावना जताई जा रही है कि वह अपने दम पर चुनाव में जाने का फैसला लें और बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरें। यदि नीतीश इस राह पर चलते हैं तो राज्य में चुनाव होने तक राष्ट्रपति शासन भी लागू हो सकता है।

नीतीश की पार्टी जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव हमेशा से बीजेपी विरोधी गठबंधन के पक्षधर रहे हैं। लालू प्रसाद यादव की पार्टी जेडीयू के पास सबसे ज्यादा 80 विधायक हैं। ऐसे में इस बात की भी संभावना है कि जेडीयू के ही कुछ विधायक टूटकर लालू के साथ चले जाएं। इस तरह लालू की पार्टी जेडीयू के बागियों, कांग्रेस के 27, सीपीआई-एमएल के 4 और 4 निर्दलीय विधायकों के साथ मिलकर सरकार बनाने का प्रयास कर सकती है।