जानिए, गुजरात के डिप्टी CM चुने गए नितिन पटेल के बारे में...

नई दिल्ली (5 अगस्त): नितिन पटेल का नाम गुजरात के मुख्यमंत्री की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था। लेकिन शाम तक आते आते स्थिति बदल गई और बाजी विजय रूपानी के हाथ लगी।

नितिन पटेल को अब गुजरात के डिप्टी सीएम की कुर्सी से ही संतोष करना पड़ेगा। 

नितिन पटेल उत्तरी गुजरात के कड़वा पटेल नेता हैं। उनकी छवि स्वच्छ और जमीन से जुड़े नेता की है। 90 के दशक से ही वह लगातार मंत्री रहे हैं। पाटीदार आंदोलन में उन्होंने सरकार और पटेलों के बीच बातचीत में मुख्य भूमिका निभाई थी। जानिए नितिन पटेल के राजनीतिक जीवन के बारे में... नितिन पटेल - नितिन पटेल का जन्म 22 जून 1956 को मेहसाणा के विसनगर में हुआ। - नितिन पटेल, पटेल समाज के बड़े नेता हैं, पटेल समाज में उनकी अच्छी पकड़ है। - उत्तरी गुजरात में उनका बड़ा जनाधार माना जाता है। - उनकी छवि स्वच्छ और जमीन से जुड़े नेता की है। - उनके पास साल 1990 से विधायक रहने का अनुभव है। - नितिन पटेल अमित शाह और पीएम नरेंद्र मोदी के करीबी हैं। - इनकी इसी निष्ठा को देखते हुए केशुभाई सरकार में उन्हें मंत्री पद भी दिया गया था। - वह जल आपूर्ति, जल संसाधन और शहरी विकास मंत्री थे। - नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में वह राज्य के वित्त मंत्री भी रह चुके हैं। राजनीतिक कैरियर - नितिन पटेल पहले मेहसाणा जिले की स्थानीय राजनीति में शामिल थे। - मूल रूप से नितिन पटेल एक कारोबारी हैं। - 1990 में मेहसाणा से पहला चुनाव लड़ा था। - BJP के टिकट पर पिछले पांच टर्म से विधायक के पद पर चुनते आ रहे हैं। - आठवीं (1990-95), नौवीं (1995-97), दसवीं (1998-02), बारवीं (2007-12) और तेरहवीं (2012- अबतक)। - केशुभाई सरकार में 1995 से 1996 तक वे स्वास्थ्य मंत्री रहे। - 1997 से 1998 तक वो कृषि मंत्री रहे। - 1999 से 2001 तक सड़क परिवहन, इरिगेशन मंत्री रहे। - नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में 2001 से 2002 तक वित्त मंत्री रहे। - 2007 से 2012 तक जल संसाधन और शहरी विकास मंत्री रहे। - नितिन पटेल अभी तक दो बार चुनाव हार भी चुके हैं। - पहली बार 2002 में राज्य विधानसभा का चुनाव हारना पड़ा, दूसरी बार वह 2004 में लोकसभा का चुनाव हार गए। - राज्य विधानसभा में वह सबसे अधिक मुखर रहे हैं और लगभग सभी मुद्दों को लेकर वह कांग्रेस पर हमला करते रहे हैं। पटेल आंदोलन के दौरान उन्होंने सरकार की ओर से बातचीत में अहम भूमिका निभाई...

- पाटीदार आंदोलन और दलितों के विरोध प्रदर्शन के बाद बीजेपी पटेलों की नाराजगी दूर करना चाहती है। - बीजेपी इसके लिए किसी पटेल उम्मीदवार को मुख्यमंत्री बनाना चाहती थी। - पिछले एक साल में पटेलों के आंदोलन की वजह बीजेपी को काफी नुकसान हो चुका है। - पिछले साल पाटीदार आंदोलन के दौरान पटेलों ने नितिन पटेल के घर पर भी हमला किया था। - इसके बावजूद यह माना जाता है कि वे उत्तरी गुजरात से आने वाले पटेलों के सबसे बड़े नेता हैं। - गुजरात में सत्ता आने के बाद से बीजेपी ने राज्य को दो पटेल मुख्यमंत्री दिए, केशुभाई पटेल और आनंदीबेन पटेल। - केशुभाई भाई पटेल और आनंदी बेन पटेल के अलावा गुजरात मंत्रिमंडल में पटेल जाति से आने वाले मंत्रियों की संख्या भी अधिक रही है। - नरेंद्र मोदी के कैबिनेट में भी पटेलों की भागीदारी सबसे ज्यादा थी। - गुजरात में पटेल समुदाय कुल आबादी का करीब 27 फीसदी है, बीजेपी के मजबूत आधार माना जाता है। - पटेल केशुभाई पटेल के शुक्रगुजार हैं जिन्होंने उन्हें मजबूत वोट बैंक में तब्दील किया। - इससे पहले गुजरात की राजनीति क्षत्रियों के इर्द गिर्द घूमती थी और वह कांग्रेस के समर्थक थे।

बीजेपी की अंदरूरनी राजनीति का फायदा मिला नितिन पटेल को... - बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और आनंदीबेन पटेल के बीच तनाव का फायदा भी नितिन पटेल को मिला। - राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 'दलित आंदोलन के बाद स्थितियां अमित शाह के पक्ष में हो गई। - इसके बाद अमित शाह ने नितिन पटेल के पीछे पूरी ताकत लगा दी। - विजय रुपानी को भी मुख्यमंत्री पद की दावेदारी में शामिल समझा जा रहा था - रुपानी ने संगठन के लिए काम करने की इच्छा जताने के बाद नितिन पटेल का रास्ता साफ हो गया।