भगवान के घर देर है अंधेर नहीं- निर्भया की मां

नई दिल्ली (5 मई): सुप्रीम कोर्ट में निर्भया के दरिंदों की फांसी की सजा बरकरार रखी है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर पूरा देश संतोष व्यक्त कर रहा है। वहीं निर्भया के माता-पिता भी अपनी बेटी के साथ हैवानियत करने वालों को देश की सबसे बड़ी अदालत से मिली मौत की सजा पर खुशी का इजहार किया है।


- सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद निर्भया की मां ने कहा कि भगवान के घर में देर है अंधेर नहीं। साथ ही उन्होंने कहा कि वो हर पीड़ित लड़की के लिए लड़ती रहेंगी।


- वहीं निर्भया के पिता बर्दी सिंह ने कहा कि न्याय मिलने में देर जरूर लगी लेकिन न्याय मिला है और अब कोई गिला शिकवा नहीं है।


- उधर यूपी के बलिया में निर्भया के 70 साल से ज्यादा उम्र के दादा लालजी सिंह ने कहा कि उनकी बेटी के दरिंदों की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर लगने के बाद ही वह चैन से मर सकेंगे।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए निर्भया के दोषियों की फांसी की सजा पर अपनी मुहर लगा दी। कोर्ट ने आरोपी अक्षय, विनय, मुकेश और पवन को फांसी की सजा सुनाई है।


16 दिसंबर 2012 की रात देश की राजधानी दिल्ली में 6 लोगों ने 23 साल की मेडिकल स्टूडेंट के साथ चलती बस में गैंगरेप किया। दोषियों में एक 17 साल का नाबालिग भी शामिल था। पीड़ित अपने दोस्त के साथ मूवी देखने के बाद घर वापस लौट रही थी। वे गंतव्य तक जाने के लिए बस में सवार हुए, जहां आरोपियों ने उसके दोस्त की पिटाई की और वहशियाना ढंग से पीड़ित के साथ गैंगरेप किया। 29 दिसंबर को पीड़ित की मौत हो गई। ट्रायल के दौरान एक आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगा ली थी जबकि छठा आरोपी नाबालिग था, जिसे 3 साल तक जूवेनाइल होम में रखने का आदेश दिया गया था।