नव दु्र्गा के रूप में नौ दिव्य औषधियां..!

नई दिल्ली ( 21 सितंबर ):   नवदुर्गा, यानी मां दुर्गा के नौ रूप। इन 9 औषधि‍यों में भी विराजते हैं, मां अम्बे के यह नौ रूप, जो समस्त रोगों से बचाकर जगत का कल्याण करते हैं। नवदुर्गा के नौ औषधि स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया और चिकित्सा प्रणाली के इस रहस्य को ब्रह्माजी द्वारा उपदेश में दुर्गाकवच कहा गया है।    ऐसा माना जाता है कि यह औषधि‍यां समस्त प्राणि‍यों के रोगों को हरने वाली और और उनसे बचा रखने के लिए एक कवच का कार्य करती हैं, इसलिए इसे दुर्गाकवच कहा गया। इनके प्रयोग से मनुष्य अकाल मृत्यु से बचकर सौ वर्ष जीवन जी सकता है।  दिव्य गुणों वाली 9 औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा को हर दिन आपको बतायेंगे। आज पहले दिन  शैलपुत्रीः   - प्रथम शैलपुत्री यानि हरड़ - नवदुर्गा का प्रथम रूप शैलपुत्री माना गया है। कई प्रकार की समस्याओं में काम आने वाली औषधि‍ हरड़, हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप हैं। यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है, जो सात प्रकार की होती है।    इसमें हरीतिका (हरी) भय को हरने वाली है। पथया - जो हित करने वाली है।   कायस्थ - जो शरीर को बनाए रखने वाली है। अमृता - अमृत के समान हेमवती - हिमालय पर होने वाली। चेतकी - चित्त को प्रसन्न करने वाली है। श्रेयसी (यशदाता) शिवा - कल्याण करने वाली।... क्रमशः