13 महीने बाद था शहीद का रिटायर्मेंट, रक्षा बंधन पर साथ रहने का किया था वादा

नई दिल्ली (19 सितंबर): उरी में शहीद होने वालों में राजस्थान के राजसमन्द जिले के निम्ब सिंह रावत भी शामिल है। 13 महीनों बाद ही वे सेवानिवृत होने वाले थे लेकिन इससे पहले ही देश के लिए अपनी जान देकर इस दुनिया से ही वे रुखसत हो गए। रक्षा बंधन पर घर आने के दौरान भी उन्होंने अपने परिवार वालों को आश्वाशन दिया था की रिटायरमेंट के बाद वे परिवार वालों के बीच ही रहेंगे। 

उन्होंने विरासत में देश सेवा सीखी थी। बहादुरी, वीरता और देश की रक्षा का प्रण वो बचपन में ही ले चुके थे। उनकी रगों में देशप्रेम दौड़ रहा था। ये विरासत उन्हें अपने पिता से मिली थी और उनके पिता खुद भारतीय सेना में थे। शहीद निम्ब सिंह के पिता कृष्णसिंह ने 1945 में हुए द्वितीय विश्वयुद्ध में दुश्मनों से लोहा लिया था। वे करीब 7 साल तक जर्मन जेल में रहे। 

जर्मन जेल से रिहा होने के बाद देश की सेवा करते रहे। बाद में सिविल में राजस्थान पुलिस में भी सेवा की। ऐसे में देशभक्ति का जज्बा शहरी निम्बसिंह में शुरू से ही था। उन्होंने बचपन से ही पिता की तरह देशसेवा करने की ठान ली थी।  और उन्होंने सेना में शामिल होने को ही अपना करियर भी चुना। शहीद रावत पहले बंगाल के जलपाई गुड़ी में कार्यरत थे। भले ही परिवार के लोगों के बीच घर के सदस्य के बिछुड़ने का दुःख है लेकिन जब से उनके शहीद हुआ है, परिवार के लोग ही नहीं बल्की पूरा गांव अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

आतंकी हमले में शहीद होने की जानकारी सुबह से परिवार और गांव वालों को मिल गयी थी। जैसे ही शहीद की 40 साल की पत्नी रोड़ी देवी को यह खबर मिली वह बेसुध हो गयी बच्चे भी दिन भर बिलखते नज़र आये। शहीद निम्ब सिंह की चार संतान है जिनमे पायल, लता और आशा के साथ बेटा चन्दन है। हालांकि इन्हें भी उनके पिता के शहीद होने की खबर पहले नहीं दी गयी लेकिन जब घर में कोहराम मचा तो वे भी बिलख पड़े। चन्दन परिवार का सबसे छोटा बेटा है जो की दूसरी कक्षा में पढ़ रहा है।