उत्तरकाशी में जवान बने भगवान बचाई पर्वतारोही की जान

नई दिल्ली (23 जून): हिमालय की ऊंची चोटियों को जीतने निकली एक पर्वतारोही उत्तरकाशी के एक ग्लेशियर में समा गई। पाताल तक गहरी बर्फ की दरार में एक लड़की 90 मिनट तक फंसी रही, लेकिन न उसने हिम्मत हारी और न उसे बचाने वाले जवानों ने।

नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की टीम ने उत्तरकाशी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर एक पर्वतारोही लड़की की जान बचा ली। समुद्रतल से 4817 मीटर की ऊंचाई, माइनस 10 डिग्री सेल्सियस की जमा देने वाली बर्फ की अनंत गहराई और ग्लेशियर की सिर्फ डेढ़ फीट चौड़ी दरार यानी क्रेवास में फंसी पुणे की जयश्री। जैसे ही जयश्री के क्रेवास में फंसने की खबर लगी, पूरे खेमे में हड़कंप मच गया।

बर्फ की अनंत गहराई और सिर्फ डेढ़ फीट चौड़ी इस दरार में जयश्री का कुछ पता नहीं चल पा रहा था। अचानक दरार के भीतर पचास फीट से भी ज्यादा गहराई पर जयश्री के सिर पर बंधी हेड लैंप की रोशनी टिमटिमाने से उसके अटके होने का सुराग लगा। निम के जवानों ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। पहले निम के एक जवान को रस्सियों के सहारे क्रेवास के भीतर भेजकर जयश्री की लोकेशन पता लगाई गई।

बर्फ की दरार में भीतर जाकर जवान ने उसे एंकर लगाया और उसे बाहर खींचने की कोशिश की, लेकिन पहली कोशिश में बर्फ की बेहद संकरी दरार में बुरी तरह फंसी जयश्री को नहीं निकाला जा सका। दूसरी कोशिश की गई। कड़ाके की ठंड में बर्फ के बीच फंसी जयश्री की हालत हर मिनट के साथ बिगड़ती जा रही थी। डेढ़ घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में जयश्री को सुरक्षित बाहर निकालने में निम के जवान कामयाब रहे।

निम से पर्वतारोहण की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से आई 35 लड़कियां 5670 मीटर ऊंचे द्रोपदी का डांडा पीक तक चढ़ाई करने के लिए निकली थीं, तभी ये हादसा हो गया। क्रेवास में फंसकर मौत के मुंह से बाहर आयी जयश्री को पर्वतारोहण की ट्रेनिंग काम आई और 90 मिनट तक बिना हिले डुले वो बर्फ की सुरंग में बनी रही।