NIA के शक के दायरे में गुरदासपुर के एसपी सलविंदर सिंह

नई दिल्‍ली (5 जनवरी): पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले से पहले आतंकियों ने एसपी सलविंदर सिंह के बयान पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। एनआईए अब एसपी सलविंदर सिंह को उस जगह पर ले जाएगी जहां वह वारदात होने की बात कह रहे हैं। एनआईए सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में एसपी सलविंदर सिंह, उनके रसोईया और दोस्त राजेश वर्मा का बयान आपस में नहीं मिल रहा है। टोल प्लाजा के सीसीटीवी फूटेज में एसपी के एसयूवी के मूवमेंट की पहचान हो चूकी है। वहीं सीसीटीवी की तस्वीर के जरिए 40 लोगों की पहचान भी हो चुकी है।

सलविंदर का बयान: सलविंदर सिंह की मानें तो आतंकियों ने उन्हें बंधक बनाकर उनकी कार कब्जे में ले ली थी। उनके साथ कार में उनके ड्राइवर और मित्र राजेश वर्मा भी थे। सलविंदर सिंह ने बताया कि वह बिना वर्दी के सरकारी गाड़ी से जा रहे थे। वह रात को 11 बजे के आस-पास वापस लौट रहे थे। उसी वक्त कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया। वो सभी फौज की वर्दी में थे। सलविंदर ने कहा कि उन लोगों ने उनसे गाड़ी की लाइट बंद करने को कहा और कार में जबरन घुसकर उन्हें पीछे की तरफ फेंक दिया। आतंकियों ने फिर सलविंदर और उनके कुक को वहीं छोड़ दिया और एसपी के दोस्त राजेश वर्मा को साथ लेकर आगे निकल गए।

सलविंदर के बयान पर इसलिए खड़े हुए सवाल: एनआईए अब भी इस गुत्थी में उलझी हैं कि आखिर आतंकवादियों ने एसपी सलविंदर और उनके साथियों को छोड़ क्यों दिया? आतंकियों ने ऐसा तब किया जब वो पहले एक दूसरी गाड़ी को अगवा कर उसके ड्राइवर को मार चुके थे। सलविंदर सिंह का कहना है कि उस वक्त वह पुलिस की वर्दी में नहीं थे और उन्होंने आतंकियों को अपने आम इंसान होने की जानकारी ही दी थी।

सलविंदर ने कहा कि जिस वक्त आतंकियों ने उनका अपहरण किया, वह पठानकोट में एक ख्वाजा की मजार से गुरदासपुर लौट रहे थे। देर रात भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर एसपी का बिना किसी सुरक्षा के जाना अपने आप में संदेह पैदा करता है। एसपी ने कहा कि वह धार्मिक काम से गए थे इसलिए हथियार भी लेकर नहीं गए थे।

सलविंदर सिंह पर सवाल उठ रहे हैं कि पुलिस में होने के बावजूद उन्होंने आतंकियों से लोहा लोने की कोशिश क्यों नहीं की। उनके आतंकियों के चंगुल से छूट जाने के बावजूद पंजाब पुलिस अलर्ट क्यों नहीं हुई। उन्होंने किसे जानकारी दी थी और जानकारी देने के बाद कार्रवाई क्यों नहीं हुई। आतंकी कैसे बेखौफ शहर में घूमते रहे और आधी रात को एयरबेस में दखल हो गए।

एसपी से अलग है उनके दोस्त राजेश वर्मा का बयान: राजेश ने अपने बयान में कहा कि जब आतंकियों ने उन्हें रोका तो उन्होंने शीशा नीचे करके बताया कि गाड़ी में एसपी साहब बैठे हैं। वहीं एसपी सलविंदर सिंह का कहना है कि आतंकियों को इस बारे में जानकारी नहीं थी कि मैं एसपी हूं। दोनों बयानों में यह अंतर कई सवाल छोड़ता है। उन्होंने अपने बयान में आतंकियों की संख्या 4-5 बताई है। सही संख्या वो नहीं बता पाए।

वीडियो:

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