टेरर फंडिंग केस: NIA ने की आतंकी सैयद सलाहुद्दीन के परिजनों से पूछताछ

नई दिल्ली ( 15 मार्च ): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने टेरर फंडिंग मामले में बुधवार को हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन के परिजनों से पुछताछ की है। एनआईए ने सलाहुद्दीन के चार बेटों और एक दामाद सहित छह लोगों से श्रीनगर में पूछताछ की। सभी से 2011 के आतंकी फंडिंग मामले में पूछताछ की जा रही है।

सलाहुद्दीन का बड़ा बेटा शकील यूसुफ श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में चिकित्सा सहायक के रूप में काम करता है। पूछताछ के लिए अन्य पांच लोगों के साथ वह एजेंसी के सामने पेश हुआ। ये सभी सलाहुद्दीन से धन लेने के संदिग्ध हैं। एनआइए यह जानना चाहती है कि अमेरिकी इंटरनेशनल वायर ट्रांसफर कंपनी के माध्यम से पिता द्वारा भेजे गए पैसे का क्या इस्तेमाल किया।

एजेंसी ने आरोप लगाया है कि यूसुफ सहित कुछ भारतीय अरब में बैठे हवाला आपरेटर एजाज बट्ट के संपर्क में थे। आरोप है कि मनी ट्रांसफर कोड हासिल करने के लिए यूसुफ आपरेटर से टेलीफोन पर संपर्क करता था। अधिकारियों ने कहा कि यूसुफ से फिर पूछताछ की जा सकती है।

एनआइए ने अप्रैल 2011 में मामला दर्ज किया था। यह मामला हवाला चैनल के माध्यम से दिल्ली के रास्ते पाकिस्तान से जम्मू कश्मीर में पैसा ट्रांसफर किए जाने से संबंधित था। एजेंसी का मानना है कि इसका इस्तेमाल आतंकवाद और अलगाववादी गतिविधियों में किया गया। एनआइए ने जीएम बट्ट सहित छह लोगों के खिलाफ दो आरोपपत्र दायर किए हैं। 

कौन है सैयद सलाहुद्दीन
सैयद सलाहुद्दीन का असली नाम सैयद मुहम्मद यूसूफ शाह है, लेकिन पाकिस्तानी खुफ़िया एजेंसी आईएसआई की सरपरस्ती में 11 नवंबर 1991 में आतंकी संगठन हिज्बुल-मुजाहिद्दीन का सरगना बनने के बाद इसने अपना नाम बदल कर सैयद सलाहुद्दीन रख लिया। हैरानी की बात यह है कि इस आतंकवादी का पूरा परिवार आज भी कश्मीर घाटी में ही रहता है।

हिजबुल मुजाहिद्दीन नेता सैयद सलाहुद्दीन को 2017 में ही अमेरिका ने वैश्विक आतंकी घोषित किया था।