न्यूज24 एक्सक्लूसिव: भारत की सीमा का अदृश्य रक्षक

दिव्या अग्रवाल, जावेद हुसैन, नई दिल्‍ली (16 जनवरी): करीब सवा तीन हज़ार किमी का बॉर्डर भारत को पाकिस्तान से अलग करता है। इसमें से ज़्यादातर एरिये को भारत ने फेंसिंग लगाकर महफूज़ कर रखा है। मगर 146 किमी का बॉर्डर एरिया अभी भी ऐसा है जहां तारबंदी कर पाना मुमकिन नहीं है और यही वो जगह हैं जहां से घुसकर आतंकी भारत में अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देते हैं। मगर अब भारत ने पाकिस्तान से लगने वाली अपनी सीमा की हिफाज़त के लिए नया रक्षक तैयार कर लिया है। ये अदृश्य रक्षक बार्डर पर आतंकी के लिए नो एंट्री का बोर्ड लगा देगा।

बीएसएफ जल्द ही बार्डर पर सिक्योरिटी के लिए इस लेज़र वॉल को इंस्टाल करने जा रहा है। ये मार्डन सिस्टम सीमा पर होने वाली घुसपैठ पर न सिर्फ पूर्ण विराम लगा देगी, बल्कि ये पल भर में दुश्मन के होश ठिकाने लगा देगी। इसके लगने के बाद देश की सीमा में नहीं घुस पाएगा कोई घुसपैठिया। ये भारत की सरहदों पर पैनी निगरानी रखेगा और बॉर्डर पार करने की कोशिश करने वालों आतंकी को मार गिराने या धर दबोचने में मदद करेगा।

भारत पर टेढी नज़र रखने वालों के लिए ये आखिरी चेतावनी है क्योंकि देश की सरहदों की निगरानी अब स्मार्ट हो रही है। ये वो अदृश्य दीवार है जिसे पार करना नामुमिकन ही। पंजाब के इंटरनेशनल बॉर्डर पर 41 ऐसे प्वॉइंट्स की पहचान की गई है, जहां नदी या उसके किनारे के करीब होने की वजह से फेंसिंग नहीं की जा सकी है। क्योंकि इन जगहों पर फेंसिंग कर पाना मुमकिन भी नहीं है। इन सभी पॉइंट्स को आतंक की नज़र से बचाने के लिए लेज़र टेक्निक का इस्तेमाल किया जाएगा और प्रॉयरिटी के आधार पर यहां लेज़र वॉल तैयार कर के इन इलाकों को महफूज़ किया जाएगा। 

पठानकोट हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बॉर्डर के एरियल सर्वे के बाद इस संबंध में दिशा-निर्देश दिए गए हैं। पीएम ने बार-बार होने वाली इस घुसपैठ को लेकर चिंता जताई थी। आपको बता दें कि बामियाल में उज्ज नदी के संदिग्ध घुसपैठ पॉइंट का इस्तेमाल आतंकियों ने पठानकोट हमले में किया था, जो लेज़र वॉल से कवर नहीं है। 130 मीटर चौड़े नदी के इस तल पर आतंकी गतिविधियों की निगरानी के लिए एक कैमरा लगाया गया था, लेकिन पाया गया है कि ये फुटेज की रिकॉर्डिंग ही नहीं कर रहा था।

लेज़र टेक्निक को समझने के लिए पिछले साल गृहमंत्री राजनाथ सिंह इस्राइल की यात्रा भी कर चुके हैं, जिसने इस तकनीक को लगाने के बाद गाज़ा पट्टी से होने वाली फिलिस्तीनियों की घुसपैठ को लगभग खत्म करने में कामयाबी हासिल की है। माना जाता है कि इस्राइल ने दुनिया का सबसे बेहतरीन बॉर्डर प्रोटेक्शन सिस्टम तैयार किया है, जिसमें इंसान का कम और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ज़्यादा है। इसमें हाईक्वॉलिटी लॉन्ग रेंज कैमरा, नाइट ऑब्ज़रवेशन सिस्टम, थर्ड जेनरेशन थर्मल इमेज, लॉन्ग रेंज डिटेक्शन राडार, इलेक्ट्रानिक टच और मोशन सेंसर तकनीत से सरहद को सुरक्षित बनाया गया है।

ऐसा नहीं है कि भारत पहले से इस टेक्निक का इस्तेमाल नहीं कर रहा है। एलओसी को छोड़कर करीब 3,323 किलोमीटर लंबी सीमा की हिफाजत करने में ‘फरहीन’ नाम की लेज़र की दीवार बीएसएफ इस्तेमाल कर रही है। जम्मू इलाके में बसंतर नदी, बेन नाला, करोल कृष्ण और पलोआ नाला नाम की नदियों में लेजर दीवार लगाई गई है। लेज़र वॉल से प्रोटेक्ट किए इलाके में अगर कोई आतंकी तारबंदी न होने की वजह से घुसने की कोशिश करेगा तो तेज़ आवाज़ के साथ एक अलार्म बजेगा जो सुरक्षाबलों को अलर्ट कर देगा और चंद सेकेंड के अंदर देश के दुश्मनों को मार गिराया जाएगा।

भारत-पाक की सीमा पर कई ऐसे इलाके हैं जहां बाड़बंदी कर पाना मुमकिन नहीं है। इन्हीं इलाकों में लेज़र वॉल खड़ी की जाएगी। इसका मकसद पाकिस्तान से घुसपैठ में मानवीय चूक की संभावनाएं को खत्म करना है। आपको बता दें कि मौजूदा समय में भारत-पाक सीमा के 15 फीसदी हिस्से और बांग्लादेश की सीमा से सटे 35 फीसदी हिस्से में बाड़ नहीं लगी हुई है। लेज़र वॉल शायद कभी भी तारबंदी की जगह नहीं ले सकती, लेकिन इस स्मार्ट फेंसिंग से भारत और पाकिस्तान की करीब सवा तीन हज़ार किमी लंबी सरहद के उन गैप्स को ज़रूर भरा जा सकता है। जहां ज़मीन और मौसम की वजह से तारबंदी मुमकिन नहीं है और चौतरफा हमले का खतरा झेल रहे भारत के लिए ऐसे हर गैप को बंद करना बेहद ज़रूरी है। नदियों और घाटियों जैसे इलाकों के लिए ये लेज़र वॉल बहुत कारगर साबित होगी।

देखिए पूरी रिपोर्ट:

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