NEWS24 EXCLUSIVE: गद्दार गिलानी के परिवार का पाकिस्तान कनेक्शन

प्रशांत देव, नई दिल्ली (2 अगस्त): टेरर फंडिंग की जांच में जुटी एनआईए अब गिलानी के बेटों से पूछताछ करेगी। एजेंसियों को इस मामले में नए सबूत हाथ लगे हैं। इससे हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के परिवार के आतंकियों से सीधा संबंध होने की बात सामने आई है। गिलानी के बड़े बेटे नईम के यहां से हिज्बुल मुजाहिदीन के एक कमांडर की चिट्ठी मिली है। जिसमें उसे मदद के लिए शुक्रिया कहा गया है।

हुर्रियत कांफ्रेंस के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी के बेटे को हिज्बुल मुजाहिदीन का कमांडर चिट्ठी लिखता है और थैंक्यू बोलता है। आतंकी कहता है कि भाई जान, आपकी मदद के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। खुफिया जांच में हुआ ये वो खुलासा है, जिससे गिलानी के पूरे खानदान की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। टेरर फंडिंग से जुड़ी जांच में जब सैयद अली शाह गिलानी के बड़े बेटे नईम गिलानी पर शिकंजा कसा और छापेमारी हुई। तो गिलानी खानदान के आतंकी कनेक्शन को लेकर बड़ी लीड मिली।

सूत्रों की मानें तो एनआईए को नईम के यहां से एक चिट्ठी हाथ लगी है। ये चिट्ठी उसे हिज्बुल मुजाहिदीन के एरिया कमांडर बुरकान ने लिखी थी। बुरकान ने अपनी चिट्ठी में नईम गिलानी को मदद के लिए शुक्रिया कहा है। सूत्रों की मानें तो सैयद अली शाह गिलानी का बेटा नईम हिज्बुल के एरिया कमांडर बुरकान के लगातार संपर्क में था। सुरक्षा बलों के सख्त ऑपरेशन के बीच बुरकान ने उससे मदद मांगी थी और नईम ने इसमें जरा भी देरी नहीं की। अब आतंकी एरिया कमांडर की नईम ने किस तरह की और कैसी मदद दी, इसकी जांच हो रही है।

एनआईए की जांच में सैयद अली शाह गिलानी के आतंकियों से करीबी रिश्ते को लेकर एक नहीं कई सबूत हाथ लगे हैं। संसद हमले के दोषी आतंकी अफजल गुरु भी गिलानी को चिट्ठी लिखा करता था। सूत्रों की मानें तो एनआईए को कश्मीर को लेकर लिखी गई, अफजल गुरू की एक चिट्ठी हाथ लगी है। अफजल गुरु ने गिलानी को ये चिट्ठी 2009 में लिखी थी।

संसद पर हमले के 8 साल बाद लिखी गई इस चिट्ठी से अफजल और सैयद अली शाह गिलानी के करीबी संबंधों का पता चलता है। गद्दार गिलानी के परिवार के पाकिस्तान कनेक्शन पर भी बड़ा खुलासा हुआ है। हुर्रियत कांफ्रेंस के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी के बेटे नईम से जुड़े ऐसे दस्तावेज सामने आए हैं। जिससे पता चलता है कि नईम गिलानी कश्मीरी युवाओं को पाकिस्तान के मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने की सिफारिश करता था।

सूत्रों की मानें तो पाकिस्तान का ये दलाल इसकी एवज में कश्मीरी नौजवानों से पैसे ऐंठता था। ये उसकी कमाई का बड़ा धंधा था। पेशे से सर्जन रहा नईम गिलानी 11 साल पाकिस्तान में रह चुका है। वो 2010 में भारत लौटा था। अब इस बात की भी पड़ताल की जा रही है कि नईम गिलानी कश्मीरी नौजवानों को मेडिकल की पढ़ाई के लिए पाकिस्तान भेजता था या फिर उन्हें पाक भेजने के पीछे कोई और मकसद था। कहीं इसका मकसद आतंकी ट्रेनिंग दिलाना तो नहीं था ?

गिलानी को डर था कि एक ना एक दिन उसका कच्चा चिट्ठा खुल सकता है। इस डर के बाद उसने दिल्ली में मीडिया में पैठ बनाने की भी कोशिश की। सूत्रों की मानें तो इसी मकसद से उसने अपनी नातिन-उरुवाशा को दिल्ली की एक बड़ी मीडिया कंपनी में नौकरी दिलवाई। एक तरफ तो सैयद अली शाह गिलानी कश्मीर के नौजवानों को पत्थरबाज बनाने के लिए साजिशें रचता है। उन्हें पाकिस्तानी फंडिंग से लुभाता है तो दूसरी तरफ अपने परिवार की नई पीढ़ी को अच्छी से अच्छी नौकरी दिलाने के लिए तमाम सेटिंग करता है।

सूत्रों की मानें तो सैयद अली शाह गिलानी ने अपने नाती अनीस-उल-इस्लाम को शेरे कश्मीर इंटरनेशनल में नौकरी दिलाई ये जम्मू कश्मीर सरकार से जुड़ा संस्थान है। ये नौकरी उस वक्त दी गई जब बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर जल रहा था और जब कश्मीर में चारों तरफ हड़ताल हो रही थी। नौकरी के लिए 200 लोगों ने आवेदन दिया था, पद सिर्फ एक था। जिस पर गिलानी के नाती को चुना गया। अब इस बात की जांच हो रही है कि कहीं गिलानी ने इसके लिए राज्य सरकार में अपने कथित संपर्कों का तो इस्तेमाल नहीं किया।

अपने परिवार के लिए ऐशो-आराम की जिंदगी का इंतजाम करना और कश्मीर के बाकी नौजवानों को आतंक व अशांति की आग में झोंकने वाले सैयद अली शाह गिलानी का वो सच है जो ये साबित करने को काफी है कि कश्मीरियत का ये फर्जी झंडाबरदार कितना शातिर है।