बुढ़ापे में भी जेल में रहने को मजबूर यह 'बंदिनी'

नई दिल्‍ली (9 अप्रैल): बंदिनी उन महिलाओं की कहानी है जो ढलती उम्र में जेल की सलाखों के पीछे हैं। किसी की उम्र 75 साल है, किसी की 80 तो कोई मौत की कगार पर पहुंच गई हैं। काल कोठरी में उनकी पूरी जिंदगी कट चुकी है। जेल के पीछे जिंदगी सिसक रही है और जेल के बाहर उनके परिवार को उनकी रिहाई का इंतजार है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने मांग की है कि 75 साल से ज्यादा उम्र की उन महिलाओं को जेल से आजाद करना चाहिए, जिनपर कोई गंभीर अपराध का केस नहीं है। मानवीय पहलू को देखते हुए उन्हें खुली हवा मे सांस लेने की आजादी मिलनी चाहिए। आज हम कुछ ऐसी ही महिलाओं की बात करेंगे जिन्हें मौत से पहले चाहिए जेल से रिहाई।

लंबे वक्त से जेलों में बंद इन महिलाओं की रिहाई के लिए अभी तक कोई आवाज नहीं उठी थी। लेकिन अब इन महिलाओं के परिवारवालों के साथ साथ संसद में भी ये मुद्दा गूंजा है। चर्चा ये हो रही है कि क्या जेल में बंद लंबे समय से सजा काट रही इन महिलाओं को आजादी मिलनी चाहिए और उम्र के आखिरी पड़ाव में अपनों के साथ जिंदगी जीने का मौका मिलना चाहिए?

वीडियो:

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