News 24 Exclusive: आपकी दाल और प्याज़ कौन महंगा कर रहा है?

नई दिल्ली (19 अप्रैल): दाल जो एक महीने में बीस से चालीस रुपए महंगी हुई है। प्याज बीस से तीस रुपए किलो आप खरीद रहे होंगे लेकिन क्या आप जानते हैं, थोक मंडी में प्याज तीस पैसे किलो भी बिक रही है? इसीलिए देश में दाल की कीमतों की पड़ताल करना जरूरी हो गया, ताकि हम सरकार की आंखें खोल सकें और ताकि सरकार ऐसे कदम उठा सकें, जिससे दोबारा दाल की कीमतें दो सौ रुपए के पार ना चली जाएं।

जानकार कहते हैं कि इस वक्त दाल के दामों में जो तेज़ी आई है, वो खतरे की बहुत बड़ी घंटी है। सरकार को फौरन दाल की कीमतों को काबू करने की जरूरत है। पिछले साल दाल के दामों पर जनता की खूब खरी-खोटी सुन चुकी सरकार शायद इस बार संभलकर चलना चाहती है। बताया जा रहा है कि सरकार ने 50 हजार टन दाल खरीद ली है और 25 हजार टन दाल खरीदने की तैयारी की है। राज्यों को केंद्र से निर्देश दिया गया है कि दाल की जमाखोरी पर कड़ी निगाह रखें। राज्यों में दाल की स्टॉक लिमिट तय करें। केंद्र ने राज्यों से ये भी पूछा है कि उनके सूबे में कितनी दाल की जरूरत होगी ? दाल की न्यूनतम समर्थन मूल्य में 275 रुपए प्रति क्विंटर का इजाफा किया है। ताकि किसान दाल की खेती पर ज्यादा से ज्यादा जोर दें।

भारत में दाल की मामूली कमी भी दाल के दामों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बढ़ा देती है। इसलिए दुनिया के वो देश जो दाल का उत्पादन करते हैं उनकी निगाह भारत पर अभी से लगी हुई है। भारत में दाल की कमी ने कैसे दूसरे देशों में अर्थव्यवस्था के अच्छे दिन लाए हैं, अब वो भी जाने।

भारत में दाल की कमी को देखते हुए कनाडा ने 50 लाख एकड़ में दाल की बुआई की है। कनाडा ही भारत को सबसे ज्यादा दाल देता है। ऑस्ट्रेलिया ने भी भारत की मांग और कमी को देखते हुए दाल का उत्पादन बढ़ा दिया है। भारत में दाल की कमी देखते ही दूसरे देश अपने यहां दाल की कीमत बढ़ा देते हैं। जैसे पिछले साल म्यांमार में अरहर का भाव 1100 डॉलर प्रति टन था, लेकिन भारत में मांग बढने पर 2000 से 2100 डॉलर प्रति टन म्यांमार ने दाम कर दिया। अफ्रीकी देशो में अरहर के भाव 850 डॉलर प्रति टन था, उन देशों ने भी भारत में मांग बढने पर दाम 1500 डॉलर पर पहुंचा दिया।

ऐसे में जरूरी है कि सरकार देश में दाल की कमी का जल्द से जल्द अंदाजा लगाकर कीमत बढ़ने से पहले आयात करे। वर्ना पिछली बार की तरह दाल आयात करने में जैसे सरकार ने देरी की थी, उसका खामियाजा आपको और हमको भुगतना पड़ा था।

दाल के बाद अब प्याज की बारी:

प्याज की कीमत इस वक्त आप बीस से तीस रुपए प्रति किलो के तौर पर दे रहे हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि प्याज थोक मंडी में किस दाम में बिक रही है? तीस पैसे प्रति किलो से लेकर पांच रुपए प्रति किलो तक। जी हां, यही दाम है प्याज का थोक मंडी में। लेकिन बिचौलियों की चुस्ती और सिस्टम की सुस्ती की वजह से सस्ते प्याज का फायदा ना आपको मिल रहा है ना किसान को।

ज्यादा दिन नहीं बीते हैं जब प्याज की महंगाई जनता के आंसू निकाल रही थी। जब प्याज के दाम पहले पचास रुपए के पार हुए थे। फिर सत्तर, अस्सी रुपए क्रॉस हो गए थे। एक किलो प्याज लेने वाले पाव भर से काम चला रहे थे। लेकिन अब प्याज सस्ता होने के बाद भी किसानों को रुला रहा है और आपको असली फायदा नहीं पहुंच रहा। क्योंकि बीच में बिचौलियों और जमाखोर सारा फायदा लूट ले रहे हैं।  

एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी नासिक में थोक व्यापारी 6 रुपए किलो प्याज बेच रहे हैं, वो प्याज जो किसानों से सिर्फ 30 पैसे या फिर 50 पैसे प्रति किलो खरीदी गई है। महाराष्ट्र में एक तो सूखा और ऊपर से प्याज बर्बाद होने के डर से किसान सिर्फ 30 पैसे में अपना प्याजा थोक मंडियों में बेचने को मजबूर हैं। मध्य प्रदेश के नीमच में किसानों ने तीस पैसे प्रति किलो अपना प्याज बेच दिया। अब सीधा सा सवाल ये है कि जब किसान 30 पैसे से 5 रुपए में अपनी प्याज थोक में बेच रहा है तो क्यों फुटकर में प्याज की कीमत 20 से 30 रुपए किलो है? क्यों चार से दस गुना महंगा प्याज फुटकर में बेचा जा रहा है ?

दरअसल किसान के खेत से मंडी तक जो प्याज इतना सस्ता है उसका अपके मोहल्ले, आपकी घर के पास की मार्केट तक पहुंचने पर महंगा होने का अर्थशास्त्र सिर्फ इतना है कि मौज बिचौलिए काट रहे हैं। माफिया की मेहरबानी से ही दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों से लेकर छोटे-छोटे शहरों की सब्जी मंडियों में प्याज की कीमतें कई गुना ज्यादा बिक रही हैं। प्याज के दामों पर गौर करें तो

शहर     थोक भाव           खुदरा भाव

दिल्ली  6-11 रु/ किलो    15-20 रु/किलो मुंबई  11-12 रु/ किलो    16-18 रु/किलो चंडीगढ़  8-10 रु/ किलो   15-16 रु/ किलो लखनऊ  15-16              20-25 जयपुर   10-13               16-18 पटना      12-14              18-20 भोपाल    5-8                  10-12

किसान अपने प्याज की लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं और जमाखोर बिचौलिए प्याज की कीमतों में आग लगाए हुए हैं। आशंका इस बात की भी है कि ऐसे जमाखोरों की वजह से ही प्याज के दाम कुछ महीने बाद आसमान छूने लगेंगे। सरकार को जमाखोर माफियाओं पर नकेल अभी से कसनी होगी। ताकि लोगों की थाली से प्याज गायब न हो।

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