बिहार टॉपर्स घोटाला खुलासा: पैसे पर बिकती थी छात्रों की आंसरशीट

पटना (25 जून): बिहार टॉपर्स घोटाले में छात्रों के आंसरशीट को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। एसआईटी के पूछताछ में खुलासा हुआ है कि कॉलेजों की मान्यता के लिए मोटी रकम वसूली जाती थी। साथ ही क्लास में टॉपर बनाने के लिए अलग से सौदा होता था।

एसआईटी के मुताबिक नकल के रैकेट से बिहार विद्यालय शिक्षा समिति (BSEB) के पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने खूब पैसे कमाए। मिली जनाकारी के अनुसार सिंह और उनकी पत्नी ऊषा सिन्हा ने बोर्ड में बड़ा गड़बड़झाला किया। दोनों ने मिलकर पद का दुरुपयोग किया और बोर्ड को लूटा। बता दें कि ऊषा सिन्हा सत्तारुढ़ जनता दल (यूनाइटेड) की पूर्व विधायिका हैं और कुछ वक्त पहले तक पटना के गंगा देवी कॉलेज में प्रिंसिपल थीं।

मसलन 10वीं और 12वीं कक्षा में एक निश्चित नंबर दिलाने के लिए भी अलग-अलग कीमतें तय थीं। पुलिस अधिकारियों की मानें तो स्कूलों और इंटर कॉलेजों को मान्यता दिलाने के लिए 4-5 लाख रुपये प्रति आवेदन लिये जाते थे। वहीं, फर्स्ट डिवीजन (60 फीसदी से ऊपर) नंबर दिलाने के लिए प्रति छात्र 40-50 हजार रुपये लिये जाते थे।