...तो साबित हो जाएगा, जीवन की उत्पत्ति के पीछे नहीं है कोई 'गॉड'

नई दिल्ली (16 मार्च): आपने कभी खुद से यह सवाल किया है कि जीवन की शुरुआत कैसे हुई? हो सकता है, इस बारे में आपने जवाब तलाशने की कोशिश भी की हो। विज्ञान से लेकर धर्म के विषयों में खोजबीन की हो। पर शायद ही आप पूरी तरह से किसी भी जवाब से अभी तक संतुष्ट हुए होंगे। अगर अभी तक आपको यह जवाब नहीं मिला, तो आपके लिए ये जानकारी अहम हो सकती है।

आपको बता दें, ब्रिटेन में एक नई थियरी की खोज की गई है। दावा किया जा रहा है कि यह थियरी 'जीवन की शुरुआत कैसे हुई?' सवाल का जवाब देने के साथ ही गॉड (ईश्वर) की जरूरत ही खत्म कर देगी।

ब्रिटिश अखबार 'द इंडिपेंडेंट' की रिपोर्ट के मुताबिक, रिचर्ड डॉकिन्स की वेबसाइट पर एक लेखक ने दावा किया है, कि इस थियरी ने गॉड को 'हाशिए' पर पहुंचा दिया है। जिससे ईसाइयों में खौफ पैदा हो गया है। थियरी में कहा गया है कि जीवन किसी एक्सीडेंट (घटना) या लक (किस्मत) से एक मौलिक सूप (प्रीमॉर्डियल सूप) और प्रकाश के विस्फोट से शुरु नहीं हुआ। बल्कि, जीवन की शुरुआत खुद में एक आवश्यकता/अनिवार्यता के तौर पर हुई। यह प्रकृति के नियमों से हुआ। यह घटना पहाड़ से चट्टानों के नीचे गिरने के समान अनिवार्य घटना थी।

सबसे बड़ी पहेली था ये सवाल

वैज्ञानिकों के लिए जीवन की शुरुआत होने में सबसे ज्यादा समस्या इस बात को समझने में रही है, कि निर्जीवों में से उन जीवों की उत्पत्ति कैसे हुई? जो पर्यावरण से ऊर्जा लेकर इसे ऊष्मा के रूप में प्रसारित कर सकते हैं।

एमआईटी के शोधकर्ता की तरफ से इस नए सिद्धांत को प्रस्तावित किया गया है। जिसमें बताया गया है, कि जब अणुओं के एक समूह को एक लंबे समय के लिए ऊर्जा स्त्रोत के साथ संपर्क में लाया जाता है। तो ये ऊर्जा के प्रसार के लिए खुद में परिवर्तन करता है। इसलिए, जीवन का उत्पत्ति अणुओं के किस्मत से एक खास तरीके से व्यवस्थित होने से नहीं पैदा हुआ। बल्कि, यह एक अनिवार्य घटना रही होगी, अगर शर्तें सही हों।

यह रिपोर्ट पहली बार क्वैंटा मैगजीन में प्रकाशित हुई। बताया गया, "आप अणुओं के रैंडम समूह के साथ शुरुआत करते हैं। अगर आप उनपर लंबे समय तक प्रकाश डालें, तो आपको हैरानी नहीं होनी चाहिए कि आप एक पौधा पा जाते हैं।" पॉल रोजेनबर्ग ने रिचर्ड डॉक्सिन्स वेबसाइट पर लिखा, कि यह सिद्धांत ऐसी चीजें बना सकता है, जो 'क्रिएशनिस्ट्स' के लिए बेहद बुरा साबित होगा।

रोजेनबर्ग के मुताबिक, यह विचार कि जीवन, निर्जीव चीजों से पैदा हुआ होगा। थोड़े समय के लिए माना जाता रहा। इसकी व्याख्या सुकरात से पूर्व के दार्शनिकों की तरफ से की गई थी। लेकिन, इंग्लैंड की थियरी डार्विन के बाद पहली बार लोगों को संतुष्ट कर पा रही है। इसी वजह से इसे प्रस्तावित किया जा रहा है। इसका समर्थन मैथेमैटिकल रीसर्च की तरफ से किया गया है। इस प्रस्ताव को निरीक्षण के लिए रखा जा सकता है।