कांग्रेस का बड़ा आरोप, RTI कानून को खत्म करना चाहती है मोदी सरकार

नई दिल्ली ( 3 अप्रैल ): सरकार द्वारा सूचना के अधिकार (RTI ऐक्ट) के नियमों में बदलाव के प्रस्ताव पर कांग्रेस ने विरोध जताया है। कांग्रेस ने इन नए प्रस्तावित नियमों पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार की नीयत पर संदेह जाहिर किया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने प्रेस कांफ्रेस कर आरोप लगाया कि मोदी सरकार आरटीआई कानून को रद्द किए बगैर सूचना अधिकार (आरटीआई) कानून को खत्म करने का प्रयास कर रही है।

मनीष तिवारी ने कहा कि सरकार आरटीआई का जवाब सही तरीके से नहीं देती और इसके तहत पूरी सूचना भी नहीं दी जाती है। अपील की प्रक्रिया में विभिन्न तरह की अड़चनें पैदा की जाती हैं और इन तरीकों को औपचारिक रुप देने के लिए नियमावली में बदलाव कर रही है।


 तिवारी ने कहा कि सरकार के इस कदम का संसद के भीतर और बाहर सभी लोकतांत्रिक तरीकों से विरोध किया जाएगा और इसके लिए विभिन्न राजनीतिक दलों से भी बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि आरटीआई कानून बनने की प्रक्रिया और इसके बाद के समय में भी भाजपा के लोग आरटीआई का विरोध करते रहे हैं।

तिवारी ने कहा कि नई नियमावली के प्रारुप में प्रावधान किया गया है कि अगर कोई आरटीआई आवेदन 500 शब्दों से अधिक का है तो उसे संबंधित अधिकारी खारिज कर सकेगा। इसके अलावा सूचना प्राप्त करने का व्यय आवेदनकर्ता को वहन करना होगा।

जानकारी लेने के लिए प्रति पेज की कीमत भी 100 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है। इसके अलावा अपील प्रक्रिया को भी पहले से बहुत कठिन बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि नई नियमावली के अनुसार आरटीआई आवेदनकर्ता की मृत्यु होने पर आरटीआई का आवेदन भी समाप्त हो जाएगा।

कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार वास्तव में सरकारी अधिकारियों के कामकाज की जांच करने के जनता के अधिकार को समाप्त करना चाहती है। इसलिए वह ऐसे प्रयास कर रही है। इससे सरकार की नीयत का पता चलता है।

तिवारी ने कहा कहा कि सरकार के इन कदमों सभी प्रगतिशील व्यक्तियों और संस्थानों को विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरटीआई कार्यकर्ताओं पर पहले के मुकाबले हमले बढ़ रहे हैं जो चिंता का विषय है।

गौरतलब है कि सरकार ने सूचना के अधिकार के तहत दायर आवेदनों, उससे जुड़ी शिकायतों एवं अपीलों पर विचार करने के लिए नये नियमों का प्रस्ताव रखा है और जनता से 15 अप्रैल तक उनपर सुझाव देने को कहा है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण (DOPT) विभाग ने जनता से प्रतिक्रिया मांगने के लिए अपनी वेबसाइट पर प्रस्तावित नियम डाले हैं जिन्हें 2012 के RTI नियमों की जगह लाने का लक्ष्य है।