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कमलेश तिवारी हत्याकांड में नया खुलासा, शरीयत के बहाने वारदात को दिया था अंजाम

कमलेश तिवारी हत्याकांड में फरार हत्यारे असफाक और मोइद्दीन की गुजरात के शामलाजी से गिरफतारी के बाद गुजरात एटीएस ने दोनों से प्राथमिक पूछताछ की तो

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भूपेंद्र ठाकुर: न्यूज 24 ब्यूरो, अहमदाबाद(23 अक्टूबर): कमलेश तिवारी हत्याकांड में फरार हत्यारे असफाक और मोइद्दीन की गुजरात के शामलाजी से गिरफतारी के बाद गुजरात एटीएस ने दोनों से प्राथमिक पूछताछ की तो इस बात का खुलासा हुआ की दोनों को इस हत्या का रंज मात्र अफ़सोस नहीं है क्यूंकि वो मानते है की ये हत्या वाजेब-उल-क़त्ल है। वाजेब-उल-क़त्ल का मतलब होता है की ये हत्या न्यायसंगत है। ऐसा इन्हे मौलाना मोहसिन ने बताया था, मौलाना मोहसिन ने दोनों के दिमाग में ये बात भर दी थी की शरीयत के मुताबिक यदि कोई उनके पैगम्बर को गाली दे तो उसका क़त्ल करना गुनाह नहीं होता। अपने इरादों को और मजबूत करने के लिए असफाक और मोइद्दीन ने और भी कई मौलाना से इस बारे में राय जानी थी और उसके बाद ही पूरी तरह से इस क़त्ल का इरादा किया था। 

ऐसे दिया कमलेश तिवारी के क़त्ल को अंजाम 

मोईनुद्दीन ने कमलेश तिवारी चिलाये नहीं इसलिए उसका मुँह दबा रखा था और असफाक ने सामने से गोली चलाई। अशफाक असफाक को सर में गोली मारनी थी मगर निशाना चुका तो गोली मोईनुद्दीन के उंगलियों के बिच से निकलती हुई कमलेश तिवारी के मुंह में लगी और इसमें मोईनुद्दीन की ऊंगली में गोली की चोट भी आई, इसके बाद असफाक ने कमलेश तिवारी का चाकू से गाला रेत दिया। इसके बाद दोनों ने क़त्ल को अंजाम देने के बाद नमाज़ पढ़ कर वाजेब उल क़त्ल को अंजाम देने का अल्ला से इकरार किया।

पहले मिठाई फिर पैसे ने पकड़ाया कमलेश तिवारी के हत्यारो को 

कमलेश तिवारी की हत्या को अंजाम देकर फरार हो चुके असफाक और मोइद्दीन पैसे के चलते पकडे गए , दरअसल दोनों के पास पैसे खतम हो गए थे और उन्हें पुलिस की नज़रो से बचकर रहने और अपने ठिकाने बार बार बदलते रहने के लिए पैसे की सख्त जरुरत थी। मोईनुद्दीन और अशफाक दोनों ही सूरत के रहने वाले थे और अपने साथ लाया हुआ पैसा खत्म हो जाने के बाद परिवार और दोस्तों से आर्थिक सहायता लेने की कोशिश कर रहे थे। वही गुजरात इन से जुड़े हुए हर व्यक्ति को अपने राडार पर रखे हुए थे , फोन सर्वेलन्स के जरिये इन की हर गतिविधि पर गुजरात एटीएस नज़र रखे थी। क़त्ल के बाद असफाक और मोईनुद्दीन ने नमाज़ पढ़ी और फिर ये बरेली गए जहा किसी वकील ने इनकी कुछ मदद की , जहा असफाक ने मेडिकल सोप से कुछ दवाइया और मलमपट्टी का सामान ख़रीदा, चुकी असफाक खुद मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव था इसलिए इसने खुद ही मोईनुद्दीन की ऊँगली में मलमपट्टी की, जिसके बाद ये दोनों बरेली से इनोवा कार लेकर लखीमपुर खीरी होते हुए नेपाल गए मगर वहा कोई जानपहचान न होने से इन्हे वह ठहरना ठीक नहीं लगा और ये वह से शाहजहांपुर गए जहा इन्हे अहसास हुआ की इनके पास के पैसे ख़त्म हो गए है।

  असफाक ने पैसे के लिए अपनी पत्नी को संपर्क किया लेकिन ये दोनों जानते थे की गुजरात जाना इनके लिए खतरनाक हो सकता है लिहाजा ये किसी तरह राजस्थान और गुजरात बॉर्डर पर स्थित शामलाजी मिलने का फैसला किया , असफाक और मोईनुद्दीन के लिए शामलाजी पहुंचना भी आसान नहीं था क्यूंकि इनके पास ट्रैन में जाने तक के पैसे नहीं थे जिसके लिए इन्होने ट्रक और अन्य वाहनों से लिफ्ट तक ली है, चुकी फिजिकल और टेक्नीकल सर्वलांस से चौकन्नी गुजरात एटीएस इनकी हर हरकत पर नज़र रखे थी इसीलिए जैसे ही ये शामलाजी पहुंचे गुजरात एटीएस ने इन्हे दबोच लिया।

इनके पास संपर्क करने के लिए खुद का मोबाइल भी नहीं था क्यूंकि सूरत से लखनऊ जाते समय ही इनके दोनों मोबाइल ट्रैन से चोरी हो गया था जिसके बाद इन्होनेकिसी यात्री के फोन से अहमदाबाद की हिन्दू समाज पार्टी के अध्यक्ष जैमिल दवे को कॉल किया था , बाद में इन्होने कानपूर से जिओ का मोबाइल लिया था जिसे मर्डर के बाद इन्होने बरेली में ट्रैन में ही वो सिम छोड़ दिया जो ट्रैन अम्बाला चली गई , इस सिम को ट्रेस करते हुए एटीएस की एक टीम अम्बाला भी गई थी जहा कुछ मिला नहीं।

असफाक और मोईनुद्दीन के पहले रशीद  फैज़ान और मोहसिन को पकड़ना  गुजरात एटीएस के लिए ज्यादा मुश्किल नहीं था क्यूंकि कमलेश तिवारी के घर से मिले मिठाई के डिब्बे में बिल बी था जिससे वक्त का पता चला , जिसके बाद सीसीटीवी खानगला और संदिग्ध लोगो को तय किया , तश्वीरो के आधार पर जांच आगे बढ़ी तो सूरत के लिम्बायत इलाके पुलिस पहुंची, जहां इनकी तस्वीरें और हुलिए से इनके ठिकाने का पता चला और पुलिस ने इन्हे दबोच लिया।

गौरतलब है की असफाक २०11 में अहमदाबाद के छिपावाड में रह रहा था जिसके कुछ ही दिनों बाद ये सूरत चला गया था। असफाक पेशे से मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव था जबकि उसकी बीवी शिक्षिका है। असफाक ने कमलेश तिवारी की हत्या के लिए रिवाल्वर भी सूरत के ही लोकल गुंडे सेखरीदी थी जिसकी छानबीन की जा रही है , कमलेश तिवारी हत्याकांड में गिरफ्तार इन पांचों की योजना एक और हिन्दू नेता के क़त्ल की थी, लेकिन उसके पहले ही ये पकडे गए। 

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