रामेश्वरम को जोड़ने के लिए बनेगा नया पंबन रेल पुल

कुन्दन सिंह, नई दिल्ली (26 दिसंबर): चुनावों की आहट से ठीक पहले सरकार भले ही राम मंदिर के लिए कानून बना पाने में भले ही सफल न हो पाई हो। पर भारतीय रेलवे के तरफ से राम भक्तों को  रामायण एक्सप्रेस के बाद एक और तोहफा राम सेतू तक नई रेल लाईन साथ में रामेश्वरम आइलैंड को जोड़ने के 104 साल पुराने हो चुके रेल पुल के बदले एक नया रेल पुल के रूप में  दिया जा रहा है। 

गौरतलब है कि साल 1964 में आये भीषण समुद्री तूफान में रामेश्वरम मंदिर से लेकर धनुषकोटि तक कि रेललाईन नष्ट हो गई थी।  तूफान में रेलवे लाइन के साथ ही यात्रियों से भरी पूरी एक ट्रेन भी  तूफान में बह गई थी घटना में सैंकड़ों लोग मारे गए थे। धनुषकोडी में ही राम सेतु (एडम्स ब्रिज़) का एक छोर है जो श्रीलंका तक फैला हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी और रामेश्वरम के बाद धनुषकोडी में डुबकी लगाने के बाद ही पवित्र स्नान पूरा होता है।

अब जाकर भारतीय  रेलवे ने धनुषकोडी तक 208 करोड़ रुपये की लागत की रेल लाइन को फिर से बनाने की मंजूरी दी है। नई रेल लाईन रामेश्वरम से धनुषकोडी तक 18 किलोमीटर  लंबी होगी।  यही नहीं रेल मंत्रालय ने 104 साल पूरे कर चुके पम्बन ब्रिज के समानांतर भी एक नए पुल के निर्माण की मंजूरी दी है। यह पुल समुंदर के ऊपर तमिलनाडु के मंडपम से रामेश्वरम के बीच मौजूद है। 

मौजूदा पम्बन ब्रिज 146 स्पैन का बना हुआ है और इसका 114वां स्पैन बड़े जहाज़ों को पार कराने के लिए पंख की तरह खुल जाता है। लेकिन 250 करोड़ रुपये से बन रहे पम्बन ब्रिज को दुनिया की आधुनिकतम तकनीक से बनाया जाएगा। इसमें जहाज़ों को पार कराने के लिए पहली बार वर्टीकल लिफ्ट स्पैन लगा होगा। साथ ही इसमें भविष्य के लिए दो रेल लाइन और इलेक्ट्रिफिकेशन को ध्यान में रखा जायगा। नए ब्रिज को पुराने ब्रिज से 3 मीटर ज्यादा ऊंचाई पर बनाया जायेग ताकि हाई टाइड के समय इसपर पानी न आ सके। 

इस ब्रिज पर स्टेनलेस स्टील की पटरियां भी बिछाई जायेंगीं जो भारत में पहली बार होगा। मौजूदा पम्बन ब्रिज 24 फरवरी 1914 को शुरू हुआ था और अब यह 100 से ज्यादा पुराना हो चुका है इसलिए रेलवे के लिए इसकी जगह पर एक नया पुल बनाना जरूरी है।