भारत बना रहा है ऐसी मिसाइल, नाम सुनकर कांपे चीन और पाकिस्तान

नई दिल्ली ( 4 अगस्त ): कई साल से भारतीय सेना को ऐंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल्स (एटीजीएम) की सख्त जरूरत है। लड़ाई के दौरान इसके जरिए टैंकों को ध्वस्त किया जाता है। अब सेना को इस सिलसिले में बड़ी राहत मिल सकती है। भारत में एटीजीएम तैयार करने के लिए प्राइवेट सेक्टर का पहला प्लांट खुला है। यह कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड और इजरायल की राफेल अडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स का जॉइंट वेंचर होगा, जिसे कल्याणी राफेल अडवांस्ड सिस्टम (केआरएसएस) का नाम दिया गया है।

कल्याणी स्ट्रैटजिक सिस्‍टम्‍स लिमिटेड व इजरायल के राफेल एडवांस्‍ड डिफेंस सिस्‍टम्‍स ने गुरुवार को हैदराबाद में अपने संयुक्त उद्यम ‘कल्‍याणी राफेल एडवांस्‍ड सिस्‍टम्‍स’ की शुरुआत की। इसके जरिए एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) व अन्‍य उत्‍पादों का निर्माण किया जाएगा। कल्‍याणी ने बताया कि इस प्रोडक्‍ट से 90 फीसद स्‍थानीयकरण होगा। इस सुविधा के जरिए 500 लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा और वेंडर्स व सप्‍लायर्स के जरिए 2,000-3,000 लोगों को रोजगार मिलेगा।

प्राइवेट सेक्‍टर में मिसाइल निर्माण के लिए यह सुविधा पहली बार लांच किया गया है। इसके जरिए कुछ ही हफ्तों में उत्‍पादन शुरू करने की योजना है। कल्‍याणी ग्रुप के चेयरमैन, बाबा एन. कल्‍याणी ने रिपोर्टरों से बताया कि वे भारतीय आर्मी से ऑर्डर का इंतजार कर रहे थे। उन्‍होंने बताया अब तक उन्‍होंने अब तक 60-70 करोड़ रुपये का निवेश किया है। रॉफेल अध्‍यक्ष व सीईओ याओव हार-इवन ने कहा कंपनी ने अब तक 70 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। डिफेंस में अब तक का सबसे बड़ा एफडीआई बताते हुए कल्‍याणी कुछ ही हफ्तों में उत्‍पादन करने की योजना बना रही है।

हैदराबाद में गुरुवार को इस बाबत स्टेट ऑफ द आर्ट फैसिलिटी का उद्घाटन किया गया। जॉइंट वेंचर के तहत राफेल की हवा से जमीन में मार करने वाले मिसाइल की भी मैन्युफैक्चरिंग की जाएगी। दोनों कंपनियों के टॉप अधिकारियों ने बताया कि वे SPICE मिसाइलों की सप्लाई के लिए इंडियन एयर फोर्स से बातचीत कर रहे हैं। उनका यह भी कहना था कि जॉइंट वेंचर जरूरत पड़ने पर भारतीय सेना को आयरन डोम और डेविड स्लिंग जैसे हाई-टेक एयर डिफेंस सिस्टम भी मुहैया कराएगा।