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अनचाही कॉल्स व मैसेज से मिलेगा छुटकारा

जल्द ही बार-बार आने वाली अनचाही फोन कॉल्स और मैसेज से ग्राहकों को राहत मिल सकती है। टेलिकॉम रेग्युलेटर ने इस तरह की कॉल्स की कड़ी निगरानी के लिए ड्राफ्ट रूल्स पेश किए हैं।

नई दिल्ली ( 30 मई ): जल्द ही बार-बार आने वाली अनचाही फोन कॉल्स और मैसेज से ग्राहकों को राहत मिल सकती है। टेलिकॉम रेग्युलेटर ने इस तरह की कॉल्स की कड़ी निगरानी के लिए ड्राफ्ट रूल्स पेश किए हैं। इसके अलावा कस्टमर्स किस तरह के मैसेज रिसीव करना चाहते हैं, इसे लेकर थर्ड-पार्टी की ओर से उनकी सहमति दर्ज करने का प्रपोजल भी दिया गया है।टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने रजिस्टर्ड टेलीमार्केटिंग कंपनियों की ओर से अनचाहे कमर्शल कम्युनिकेशन (UCC) को रोकने में नाकाम रहने पर टेलिकॉम कंपनियों पर कड़ा जुर्माना लगाने को भी अनिवार्य किया है। नियमों के अनुसार यदि कोई टेलीमार्केटिंग कंपनी एक माह में 100 से ज्यादा कॉल या मैसेज करती है तो उस पर प्रति कॉल 1000 रुपए का अर्थ दंड लगेगा। 100 से 1000 तक कॉल या मैसेज करने पर कम से कम एक लाख रुपए होगा। इसके अतिरिक्त 5000 रुपए प्रति कॉल या मैसेज जुर्माना देना होगा। एक हजार से ज्यादा कॉल या मैसेज की दशा में 46 लाख रुपए जुर्माना होगा। इसके अतिरिक्त प्रति कॉल 10 हजार रुपए जुर्माना वसूला जाएगा।ट्राई ने मंगलवार को ड्राफ्ट टेलिकॉम कमर्शल कम्युनिकेशन कस्टमर प्रेफरेंस रेग्युलेशन, 2018 में कहा, 'UCC या स्पैम टेलिकॉम सब्सक्राइबर्स के लिए बड़ी समस्या है और नए रेग्युलेशंस में इसका समाधान किया गया है।' देश के टेलिकॉम नेटवर्क्स पर हर महीने लगभग 30 अरब अनचाहे मेसेज भेजे जाते हैं। ट्राई ने नए रूल्स पर स्टेकहोल्डर्स की राय लेने के लिए 11 जून की समयसीमा तय की है।इसके चेयरमैन आर एस शर्मा ने बताया, 'ट्राई की ओर से इस तरह के रेग्युलेशंस पहली बार लागू किए जा रहे हैं। कस्टमर्स पहले से अधिक कंट्रोल को पसंद करेंगे। टेलिकॉम सब्सक्राइबर्स की पसंद को दर्ज करने के बाद तुरंत ऐक्टिवेट किया जाएगा। सब्सक्राइबर्स अपनी पसंद किसी भी समय बदल या हटा सकते हैं।'उन्होंने कहा, 'लोग हमेशा सिस्टम से बचने के नए तरीके खोज लेते हैं, लेकिन नए प्रपोजल में टेक्नॉलजी और रेगुलेशन दोनों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही इसमें रूल्स का उल्लंघन करे वालों की निगरानी के जरिए भी हैं।'टेलिमार्केटिंग मैसेज के केवल उन्हें प्राप्त करने की सहमति देने वालों तक पहुंचने के लिए ट्राई ने ब्लॉकचेन टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है। शर्मा ने बताया कि यह पहली बार है कि जब ब्लॉकचेन टेक्नॉलजी का इस्तेमाल टेलिकॉम सेक्टर में इतने बड़े स्तर पर किया जाएगा।ट्राई के सचिव एस. के. गुप्ता ने बताया कि ग्राहकों का ब्योरा प्राप्त करने के लिए कई टेलीमार्केटिंग कंपनियां टेलीकॉम कंपनियों के साथ पंजीकरण करवाती हैं। परंतु नई तकनीक लागू होने से केवल उस अधिकृत एजेंसियों को और वह भी उसी वक्त इस तरह के पंजीकरण का मौका मिलेगा, जब सेवा प्रदान की जानी होगी और वे केवल उन्हीं ग्राहकों को कॉल या मैसेज भेज सकेंगी, जिन्होंने सेवा प्राप्त करने की स्वीकृति दी होगी।उन्होंने कहा कि अनुमति नहीं होने पर अधिकृत टेलीमार्केटिंग कंपनियां भी ग्राहक को बार-बार अवांछित कॉल नहीं कर सकेंगी। हो सकता है कि किसी ग्राहक ने किसी कंपनी को सेवा प्रदान करने की स्वीकृति दी हो। लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि वह कंपनी बार-बार फोन या मैसेज कर उसे तंग करे।ट्राई ने कहा है कि 2010 में शुरू की गई डु नॉट डिस्टर्ब (DND) रजिस्ट्री के अनचाही कॉल्स और मैसेज की समस्या पर लगाम लगाने में नाकाम रहने के कारण नए रूल्स को लाने का फैसला किया गया है। DND पर लगभग 23 करोड़ यूजर्स रजिस्टर्ड हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके पास अनचाही कॉल्स और मैसेज आते हैं। इसका एक कारण इन तरह की कॉल्स और मैसेज की निगरानी में कमी है।

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