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सौरव गांगुली: 'प्रिंस ऑफ कोलकाता' से बीसीसीआई के 'महाराज' तक का सफर

राहुल द्रविड़ ने एक बार कहा था कि 'ऑफ साइड पर पहले तो गॉड' हैं और फिर सौरव गांगुली। टेस्ट और वनडे क्रिकेट दोनों में ही सौरव खासे कामयाब रहे। गांगुली बेहतरीन बल्लेबाज तो थे ही, अपनी मध्यम गति की गेंदबाजी से भी उन्होंने भारतीय टीम को कई मैच जिताए हैं।

ज्ञानेंद्र शर्मा, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (23 अक्टूबर):  भारत के पूर्व खिलाड़ी और कप्तान सौरव गांगुली ने बीसीसीआई अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल ली है। सौरव गांगुली के साथ उपाध्यक्ष के पद पर महीम वर्मा, सचिव के रूप में जय शाह, अरुण धूमल (कोषाध्यक्ष) के साथ केरल के जयेश जॉर्ज संयुक्त सचिव का पद संभाला। पद संभालने के बाद सौरव गांगुली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, इस दौरना उन्होंने ने खुल कर बात की। 

क्रिकेट जगत में दादा के नाम से मशहूर सौरव गांगुली बंगाल से आते हैं।  करियर के शुरुआत में गांगुली पर अनुशासन को लेकर सवाल खड़े किए गए थे। सौरव गांगुली जब 15 साल के थे तो उनका नाम घरेलू क्रिकेट में  उठने लगा था। जब उन्हें 1996 में इंग्लैंड के लॉर्ड्स के मैदान में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था। अपने पहले ही टेस्ट में गांगुली ने शतक जड़ दिया था। बंगाल टाइगर के नाम से मसहूर सौरव एक आक्रमक खिलाड़ी तौर पर अपना नाम बनाया। 

राहुल द्रविड़ ने एक बार कहा था कि 'ऑफ साइड पर पहले तो गॉड हैं और फिर सौरव गांगुली। टेस्ट और वनडे क्रिकेट दोनों में ही सौरव खासे कामयाब रहे। वे बेहतरीन बल्लेबाज तो थे ही, अपनी मध्यम गति की गेंदबाजी से भी उन्होंने भारतीय टीम की जीत में योगदान दिया। सौरव की कप्तानी में ही भारतीय टीम ने विदेश मैदानों पर जीतने का सिलसिला शुरू किया और बाद में एमएस धोनी और विराट कोहली जैसे कप्तान ने इसे आगे बढ़ाया। 

इंग्लैंड में नेटवेस्ट ट्रॉफी में फाइनल जीतने के बाद उन्होंने हवा में शर्ट लहराई जिसे आज भी लोग याद करते हैं, यह दादा की आक्रामकता का एक सबूत था। 2002 चैम्पियंस ट्रॉफी में टीम को उन्होंने संयुक्त विजेता बनाया और वहां से भारतीय क्रिकेट का एक नया युग शुरू हुआ। 2003 विश्वकप में उन्होंने टीम की कप्तानी करने के अलावा बल्ले से भी जबरदस्त प्रदर्शन कर टीम को फाइनल तक का सफर तय कराने में अहम योगदान दिया।

चैपल-गांगुली विवाद

2005 में भारतीय टीम के कोच बने ऑस्ट्रेलिया के महान खिलाड़ी ग्रैग चैपल। सौरव गांगुली का उस समय चैपल को कोच बनाने में बड़ा हाथ रहा था। हालांकि बाद में ग्रेग चैपल ने सौरव गांगुली को ना सिर्फ कप्तानी से हटवाया, टीम से भी बाहर करवा दिया। चैपल ने टीम में दो फाड़ कर दिया था। 

गांगुली ने टीम से बाहर होने के बाद हिम्मत नहीं हारी वो लगातार टीम में आने के लिए लगे रहे।  टीम में जगह बनाई और वापसी के कुछ समय बाद 2007 में अपने करियर का पहला दोहरा शतक जड़ आलोचकों को करारा जवाब दिया। कप्तानी के सभी गुर जानने के कारण दादा को करियर के अंतिम टेस्ट मैच में धोनी ने कप्तानी करने का अवसर दिया और उन्होंने भी इसका जमकर आनंद उठाया। आईपीएल खेलने के बाद कमेंट्री करने वाले दादा के जीवन में ख़ास दिन तब आया जब उन्हें 2015 में बंगाल क्रिकेट संघ का अध्यक्ष बनाया गया।

लगभग पांच साल बंगाल क्रिकेट को देने वाले सौरव आज बीसीसीआई के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल ली है। सौरव के अध्यक्ष बनने से भारतीय क्रिकेट में कई सुधार किए जा सकते हैं। अध्यक्ष बनने के बाद अपने पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में सौरव गांगुली ने अपनी मंशा साफ कर दी है। गांगुली ने कहा हमें अपने डोमेस्टिक क्रिकेट को और बढ़ावा देना है।  

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