'कभी नहीं कहा कि ताज महल और कुतुब मीनार मंदिरों के अवशेषों पर बने'

 

नई दिल्ली (22 जनवरी) :  प्रख्यात पुरातत्वविद के के मोहम्मद ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि ताजमहल और कुतुब मीनार मंदिरों के अवशेषों पर बनाए गए थे। मोहम्मद ने एक ऑनलाइन न्यूज़ वेबसाइट की उस रिपोर्ट को पूरी तरह बकवास बताया जिसमें उनके नाम का हवाला देकर ऐसी बात कही गई थी।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पूर्व अधिकारी और अब आगा ख़ान ट्रस्ट फॉर कल्चर के साथ जुड़े मोहम्मद ने कहा कि जिस न्यूज़ आउटलेट ने रिपोर्ट प्रकाशित की है, उसने कभी उनसे किसी लेख के बारे में संपर्क नहीं किया। ये न्यूज़ रिपोर्ट मोहम्मद की आटोबॉयोग्राफ़ी 'नज्न एन्ना भारतीयन' (मैं भारतीय हूं) को आधार बना कर लिखी गई थी। ये आटोबॉयोग्राफ़ी रविवार को ही रिलीज़ हुई है। इसमें मोहम्मद ने वामपंथ की ओर झुके इतिहासविदों- प्रोफेसर इरफान हबीब, रोमिला थापर, आर एस शर्मा और डी एन झा की बाबरी मस्जिद मुद्दे को लेकर आलोचना की है।  

'टाइम्स ऑफ इंडिया'  की रिपोर्ट के मुताबिक मोहम्मद ने केरल से फोन पर कहा, हां मैंने उन इतिहासविदों में कई की अपनी किताब में आलोचना की है। लेकिन इस न्यूज़ आउटलेट ने कभी मुझसे किसी बारे में बात नहीं की। फिर वो कैसे दावा कर सकते हैं कि उन्होंने ऐसा किया।  

पुरातत्व के क्षेत्र में सम्मानित माने जाने वाले मोहम्मद के नाम अस्सी के दशक में फतेहपुर सीकरी में बादशाह अकबर का इबादतखाना खोजने का स्रेय जाता है। वे 1978 में बीबी लाल की उस टीम के सदस्य थे जिसने अयोध्या में खोदने का काम करवाया था और बाबरी मस्जिद साइट पर मंदिर के 14 खम्भों के अवशेषों का पता लगाया था। मोहम्मद ने साफ़ किया कि उन्होने साथ ही ये भी कहा था कि ये 11वीं-12वीं सदी के मंदिर के खम्भों के अवशेष थे ना कि इससे ज़्यादा प्राचीन काल के।

बता दें कि शुक्रवार को ये लेख सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और बीजेपी नेता सुब्रमण्यिन स्वामी ने भी इसे शेयर किया था। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स यहां तक कहने लगे कि अब सबूत सामने आ गया है कि कुतुब मीनार और ताज महल वाली जगह किसी वक्त पर हिंदू मंदिर थे। इन यूजर्स ने कुछ इतिहासविदों को निशाने पर भी लेना शुरू कर दिया था।

मोहम्मद ने कहा कि अगर उन्होनें मेरी किताब पढ़ी भी है तो अपनी सुविधानुसार कई हिस्सों की अनदेखी कर दी जहां मैनें ताज महल और कुतुब मीनार के हिंदू मूल को लेकर हास्यास्पद कहानियां गढने वाले तत्वों की कड़ी आलोचना की थी। उन्होनें कहा कि कुव्वातुल इस्लाम मस्जिद का मंदिर के अवशेषों पर बनने के सबूत मौजूद हैं लेकिन कुतुब मीनार या ताजमहल के नहीं।