Blog single photo

IT का छापा: सैकड़ों करोड़ का मालिक निकला माया का करीबी IAS अफसर

यूपी की पूर्व सीएम और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती के सचिव रहे रिटायर्ड IAS नेतराम के घर पर आयकर विभाग की छापेमारी में बड़ी कामयाबी मिली है। लखनऊ में हुई छापेमारी में करीब 300 करोड़ की बेनामी संपत्ति के कागजात मिले हैं। 36 घंटे की कार्रवाई में लखनऊ एवं दिल्ली आवास से 1.64 करोड़ की नकदी जब्त की गई है। इसमें लखनऊ आवास से 18 लाख मिला तो एक लॉकर से 50 लाख रुपये बरामद हुए। मोंटब्लांक कंपनी का 50 लाख रुपये का पेन और चार लग्जरी कारें भी मिली हैं। घरों में मिनी थिएटर, जिम, महंगी फिटिंग भी मिली हैं।

न्यूज 24 ब्यूरो नई दिल्ली, (14 मार्च) : यूपी की पूर्व सीएम और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती के सचिव रहे रिटायर्ड IAS नेतराम के घर पर आयकर विभाग की छापेमारी में बड़ी कामयाबी मिली है। लखनऊ में हुई छापेमारी में करीब 300 करोड़ की बेनामी संपत्ति के कागजात मिले हैं। 36 घंटे की कार्रवाई में लखनऊ एवं दिल्ली आवास से 1.64 करोड़ की नकदी जब्त की गई है। इसमें लखनऊ आवास से 18 लाख मिला तो एक लॉकर से 50 लाख रुपये बरामद हुए। मोंटब्लांक कंपनी का 50 लाख रुपये का पेन और चार लग्जरी कारें भी मिली हैं। घरों में मिनी थिएटर, जिम, महंगी फिटिंग भी मिली हैं। 

आयकर विभाग अघोषित संपत्ति, लॉकर और अन्य दस्तावेजों की जांच-पड़ताल के लिए बड़ी टीम के साथ जुटा है। यह छापेमारी आयकर विभाग की दिल्ली टीम ने की। कई बेनामी अचल संपत्तियां होने की भी आशंका है। आयकर विभाग की जांच टीमों ने मंगलवार को पूर्व आईएएस अधिकारी नेतराम और राजधानी के प्रमुख कपड़ा कारोबारी प्रतिष्ठान गाढ़ा भण्डार के 11 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापे मारे थे, जो बुधवार को भी जारी रहे। प्रदेश की बसपा सरकार में प्रमुख सचिव रहे और बसपा प्रमुख मायावती के करीबी पूर्व आईएएस अधिकारी नेतराम के दिल्ली से लेकर लखनऊ तक कई ठिकानों पर आयकर छापे की कार्रवाई खासी चौंकाने वाली रही।  

गौरतलब है कि 2007 में जब मायावती पूर्ण बहुमत के साथ उत्तर प्रदेश की सत्ता पर विराजमान हुई थीं, तब 1979 बैच के IAS नेतराम तत्कालीन मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव रहने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण पदों पर काबिज रहे। नेतराम बसपा सरकार में बेहद ताकतवर अफसरों में शुमार किए जाते थे।

आशंका जताई जा रही है कि नेतराम की 30 मुखौटा कंपनियां हैं। उनमें उनके करीबी, रिश्तेदार और परिवार के सदस्य शेयरधारक और निदेशक हैं। इन्हीं करीबियों के जरिए कंपनियों का कामकाज कागजों में चलाया जा रहा था। आयकर अधिकारियों ने बताया कि अपने रिश्तेदारों को इन कंपनियों के शेयर उपहार में दिए थे। उनके आरोप हैं कि बच्चे इन कंपनियों के बैंक खातों को चलाते हैं।

Tags :

NEXT STORY
Top