'नेपाल की धर्म-संस्कृति खतरे में'

नई दिल्ली (6 मई): एक तरफ जहां नेपाल का राजनीति में हर रोज़ कोई न कोई नाटकीय बदलाव आ रहे हैं, वहीं पूर्व नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने संकेत दिये हैं कि वो पुराना रुतवा हासिल करने के लिए सक्रिय राजनीति में आ सकते हैं नेपाली नव वर्ष के मौके पर उन्होंने कहा कि सत्ता के भूखे नेताओं को कुर्सी से उतार फेंकना चाहिए। ये सभी व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए देश को रसातल में ले जा रहे हैं। राज्य की अवधारणा दम तोड़ता नज़र आ रही है।

उन्होंने कहा कि नेपाली जनता सत्ता के भूखे नेताओँ की अपेक्षा पर खरे नहीं उतरें हैं, इसलिए उसका धैर्य भी जवाब दे रहा है। पूर्व नेपाल नरेश ने कहा कि इस देश को राष्ट्रभक्त नेतृत्व की आवश्यकता है। जो नेपाल की संप्रभुता और अस्तित्व की रक्षा कर सके। उन्होंने देश के नेताओं से अपेक्षा की कि वो भी दक्षिण एशियाई भू-राजनीति की संवेदना को समझने की कोशिश करें। उन्होंन कहा इस समय नेपाल की धर्म-संस्कृति, वेश-भूषा और भाषा पर खतरा मंडरा रहा है। इस सब को देख समझ कर ही कोई निर्णय लिया जाये।