नेपाल: मधेसी समस्या के समाधान के लिए PM मोदी को सरकारी चिट्ठी, विपक्ष ने की आलोचना

नई दिल्ली (24 अगस्त): नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड ने पीएम मोदी को पत्र लिखी है। बताया जा रहा है कि इस पत्र में मधेसियों की मांगों के समाधान के वास्ते किए गए संविधान संशोधन समेत देश के अंदरूनी मामलों का जिक्र किया गया है। इसकी मुख्य विपक्षी दल सीपीएन-यूएमएल ने कड़ी आलोचना की है। 

- रिपोर्ट के मुताबिक, केपी शर्मा ओली की सीपीएन-यूएमएल ने उपप्रधानमंत्री बिमलेंद्र निधि द्वारा कथित रूप से ले जाए गए इस पत्र को लेकर ऐतराज जताया है। - निधि प्रचंड के विशेष दूत के रूप में 17-22 अगस्त के बीच भारत यात्रा पर गए थे।  - सीपीएन-यूएमएल को चीन समर्थक के रूप में देखा जाता है।  - कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनीफाइड एमएल) ने यहां अपनी 43वीं केंद्रीय समिति की बैठक के समापन पर एक बयान में कहा, 'उपप्रधानमंत्री के माध्यम से प्रधानमंत्री प्रचंड द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को पत्र भेजे जाने की खबर है जिसमें संविधान संशोधन समेत हमारे अंदरूनी मुद्दों का जिक्र है।' - बयान में कहा गया, 'ऐसी घटना हमारी राष्ट्रीय संप्रभुता और स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने के प्राधिकार में दखल है जो महाभूल और आपत्तिजनक मामला है।'  - मुख्य विपक्षी दल ने सरकार से इस कथित पत्र को सार्वजनिक करने की मांग की है।  - सीपीएन-यूएमएल ने सरकार को ऐसा कुछ नहीं करने की चेतावनी दी जो नेपाली जनता द्वारा अपने भविष्य को खुद ही आकार देने की कवायद और उनकी गरिमा को कम करे।