नेपाल में फिर बड़े सियासी संकट के आसार, प्रचण्ड ने किया कैबिनेट का बहिष्कार

नई दिल्ली (2 जून): नेपाल में किसी बड़े राजनीतिक तूफान के संकेत नजर आ रहे हैं। बजट पेश करने के बाद सत्ता सीपीएन-एम के नेता पुष्प कमल दहल प्रचण्ड को सौंपने का वायदा करने वाले केपी शर्मा ओली कह रहे हैं कि उनके कंधों  में अभी बहुत दम है। वो देश के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारियां निभाने में पूरी तरह सक्षम हैं और अभी रिटायरमेंट नहीं लेंगे। बीते माह चार मई को सीपीएन-एम के नेता प्रचण्ड ने कहा था कि उनकी पार्टी ओली सरकार से समर्थन वापस ले रही है। अब अगली सरकार उन्हीं के नेतृत्व में बनेगी।

सीपीएन-एम के मंत्रियों ने प्रचण्ड के इस बयान के बाद मंत्रिमण्डल से इस्तीफे भी दे दिये थे। लेकिन उसी रात ओली प्रचण्ड से मिलने उनके आवास पर गये। जहां पर नौ सूत्रीय सहमति पत्र पर हस्ताक्षर के बाद प्रचण्ड ने ओली सरकार को समर्थन जारी रखने का ऐसान कर दिया। प्रचण्ड ने लोगों को बताया कि बजट के बाद ओली सत्ता उन्हें सौंप देंगे। हालांकि प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने उस वक्त प्रचण्ड की काफी आलोचना की थी और उन्हें धोखेबाज भी कहा था। इसी दौरान ओली और उनके मंत्रियों ने भारत पर सरकार का तख्ता पलट करने का आरोप भी लगाया था। नेपाल सरकार ने अचानक राष्ट्रपति बिध्या देवी भण्डारी की भारत यात्रा रद्द कर दी और भारत में नेपाल के राजदूत को वापस बुला लिया था।

इन सब आरोप-प्रत्यारोपों के बीच 28 मई को ओली ने बजट पेश भी कर दिया। लेकिन सत्ता प्रचण्ड को नहीं सौंपी। इसी के विरोध स्वरूप प्रचण्ड के मंत्रियों ने गुरुवार को हुई कैबिनेट मीटिंग का बहिष्कार कर दिया। इन परिस्थितियों में एक बार फिर नेपाली कांग्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण होती नजर आ रही है। नेपाली प्रधानमंत्री सेना के औहदेदारों में बदलाव कर अपनी पकड़ सेना पर भी मजबूत करना चाहते हैं। आज की मीटिंग में इस बात पर भी निर्णय होना था। अभी यह पता नहीं चला है कि ओली ने सेना के वरिष्ठ अधिकारियों में फेर बदल को मंजूरी दे दी है या नहीं।