आतंकवाद की बुरी शक्तियों को दूर रखने के लिए हमें और अधिक परिश्रम करना है: राष्ट्रपति

नई दिल्ली ( 25 जनवरी ): गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्या पर बुधवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति ने जोर दिया कि देश की ताकत इसकी बहुलतावाद और विविधता में निहित है और भारत में पारंपरिक रूप से तर्को पर आधारित भारतीयता का जोर रहा है, न कि असहिष्णु भारतीयता का। हमारे देश में सदियों से विविध विचार, दर्शन एक दूसरे के साथ शांतिपूर्ण ढंग से प्रतिस्पर्धा करते रहे हैं। लोकतंत्र के फलने फूलने के लिए बुद्धिमतापूर्ण और विवेकसम्मत मन की जरूरत है।

राष्ट्रपति ने आतंकवाद को लेकर कहा, ‘हमें आतंकवाद की बुरी शक्तियों को दूर रखने के लिए और अधिक परिश्रम करना है। इन शक्तियों का दृढ़ और निर्णायक तरीके से मुकाबला करना होगा। हमारे हितों की विरोधी इन शक्तियों को पनपने नहीं दिया जा सकता।’ उन्होंने कहा कि हमें अपने उन सैनिकों और सुरक्षाकर्मियों की बेहतरी को सुनिश्चित करने के लिए और अधिक परिश्रम करना है, जो आंतरिक और बाह्य खतरों से हमारी रक्षा करते हैं।

उन्होंने कहा कि हमें और अधिक परिश्रम करना है क्योंकि हम सभी अपनी मां के लिए एक जैसे बच्चे हैं। और हमारी मातृभूमि, हममें से प्रत्येक से, चाहे हम कोई भी भूमिका निभाते हों। हमारे संविधान में निहित मूल्यों के अनुसार निष्ठा, समर्पण और दृढ़ सच्चाई के साथ अपना कर्तव्य पूरा करने के लिए कहती है।