तीन तलाक पर SC बेंच में महिला जज न होने पर NCW अध्यक्ष नाराज

नई दिल्ली ( 13 मई ): राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ललिता कुमारमंगलम ने सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक की सुनवाई कर रही बेंच में किसी महिला जज के न होने पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि, 'इस मामले की सुनवाई के दौरान शोरगुल को देखकर और बेंच के जजों का धर्म अलग-अलग देखकर मुझे लगा कि ये मामला धर्म का नहीं है, बल्कि ये मामला महिलाओं और बच्चों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है।'


उन्होंने कहा, 'तीन तलाक की सुनवाई करने वाली पीठ से संबंधित चर्चा देख रही हूं। विभिन्न धर्मों के जजों को शामिल किए जाने की बात पर विचार करते हुए ये चीज मुझे परेशान कर रही है कि मुद्दे का वास्ता धर्म से नहीं बल्कि महिला अधिकारों और मानवाधिकारों के साथ बच्चों से है।


उन्होंने कहा कि, 'कम से कम एक महिला जज तो होनी ही चाहिए। मैं किसी भी जज की क्षमता पर सवाल नहीं उठा रही हूं, लेकिन जस्टिस आर बनुमथी को इस बेंच की हिस्सा होना चाहिए।' इस मामले की सुनवाई पांच जजों की संवैधानिक बेंच कर रही है।


सभी जज अलग-अलग धर्मों से आते हैं, एक सिख, एक ईसाई, एक पारसी, एक हिंदू और एक मुस्लिम। सुप्रीम कोर्ट के कुल 28 जजों में जस्टिस बनुमथी इकलौती महिला हैं। कुमारमंगलम ने मुद्दे की लैंगिक संवेदनशीलता पर जोर देते हुए कहा कि, 'मैंने जिन मुस्लिम महिलाओं से बात की है, उनका कहना है कि जिस तरह आज के मर्द तीन तलाक का इस्तेमाल करते हैं वह कुरान से बिल्कुल अलग है, आज पुरुष इसका दुरुपयोग करके महिलाओं को सताने और उन्हें हाशिए पर भेजने की कोशिश करते हैं।'


पिछले साल भी राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने तीन तलाक को पूरी तरह से बैन करने की बात कही थी। एक महीने बाद ही केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि वह इसके खिलाफ है। कुमारमंगलम का कहना है कि भले ही इस मुद्दे पर राजनीति की जा रही हो लेकिन ये पूरी तरह से मानवाधिकार का मुद्दा है।