अपराध पर नकेल कसने के लिए पुलिस को मिले आधार डेटा: एनसीआरबी

न्यूज24 ब्यूरो, नई दिल्ली ( 22 जून): नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) एनसीआरबी के डायरेक्टर ने आधार का सीमित डेटा पुलिस को भी उपलब्ध कराने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि आधार डाटा तक पुलिस की पहुंच सुनिश्चित हो तो बहुत से ऐसे मामले सुलझाने में मदद मिलेगी जो हर साल अनसुलझे रह जाते हैं। फिंगर प्रिंट्स ब्यूरो के निदेशकों की 19वीं कांफ्रेंस में यह बात कही गई।उन्होंने कहा है कि पहली बार अपराध करने वालों और लावारिस लाशों की पहचान करने के लिए आधार डेटा पुलिस के साथ भी साझा किया जाना चाहिए। एनसीआरबी चीफ इश कुमार ने 19वीं ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस ऑफ डायरेक्टर्स ऑफ फिंगर प्रिंट्स ब्यूरो में बोलते हुए बताया कि फिलहाल देश में हर साल करीब 50 लाख केस रजिस्टर होते हैं।इनमें से अधिकतर पहली बार अपराध करने वालों के होते हैं, जिनका पुलिस के पास कोई रिकॉर्ड नहीं होता। उन्होंने कहा, 'जांच के लिए आधार के सीमित डेटा तक पुलिस की पहुंच होनी चाहिए। यह जरूरी है, क्योंकि हर साल 80 से 85 फीसदी अपराधी पहली बार अपराध करने वाले होते हैं, जिनका कोई रिकॉर्ड पुलिस के पास नहीं होता।'उन्होंने कहा, 'लेकिन वे अपराध करते वक्त अपनी अंगुलियों के निशान भी छोड़ देते हैं, इसलिए आधार के सीमित डेटा तक पुलिस की पहुंच जरूरी है ताकि हम उन्हें पकड़ सकें।' उन्होंने कहा कि इसी तरह हर साल 40,000 से अधिक लावारिस लाशें बरामद होती हैं।आधार का डेटा होने पर इनकी पहचान हो सकती है और इन्हें इनके परिजनों को सौंपा जा सकता है। एनसीआरबी डायरेक्टर ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर से इस मामले पर ध्यान देने की अपील की है।