कैंसर के लिए फायदेमंद होता है वैचूर नस्ल की गाय का दूध

नई दिल्ली (31 मई): हाल ही में केरल में गोमांस को लेकर काफी बवाल हुआ है। लेकिन उसी प्रदेश में पाई जाने वाली वैचूर नस्ल की गाय के दूध में चौंकाने वाले तत्व पाए गए हैं। इस गाय का दूध ए-2 बीटाकेसीन तो है ही, साथ ही इसके दूध में कैंसर जैसी घातक बीमारी से लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी है।

यह खुलासा नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्सिज (NBAGR) में हुए अभी तक के शोध में हुआ है। संस्थान की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मोनिका सोढी की मानें तो इस गाय के लैक्टोकेरिन में आरजीनो की मात्रा अधिक होती है। यही कारण है कि इसके दूध में कैंसर प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा है।

- इस शोध में उनके साथ डॉ. मनीषी मुकेश व उनकी स्टूडेंट अंकिता शर्मा भी काम कर रही हैं। अभी तक लगभग 50 गायों पर रिसर्च की जा चुकी है।

- वहीं करीब दो वर्ष पहले न्यूजीलैंड के डा. कीथ वुडफोर्ड ने एशिया एवं यूरोपीय नस्लों पर शोध कर निष्कर्ष निकाला था कि प्राचीन काल में यूरोपीय नस्ल की गायों में म्यूटेशन होने की वजह से दूध में बीटा कैसिन ए-दो खत्म हो गया और इसकी जगह बीटा कैसिन-एक नामक विषाक्त प्रोटीन बनने लगा, जबकि भारतीय नस्लों में म्यूटेशन न होने से दूध की गुणवत्ता बनी रही।

- वैसे तो वैचूर नस्ल की यह अनोखी गाय केरल में पाई जाती है, लेकिन कारसगुड़ इसका गढ़ बताया जाता है।

- विश्वभर में 250 गायों के नस्ल में से 32 नस्लें भारतीय गोवंश की हैं।

- केरल की वैचूर प्रजाति दुनिया की सबसे छोटी नस्ल है। सांड की ऊंचाई महज तीन फुट होती है, जिनकी संख्या कम हो चुकी है।

- इस प्रजाति की गाय में सर्वाधिक 7 फीसदी वसा पाई जाती है, किंतु संख्या बढ़ाने पर सरकारों ने कोई रुचि नहीं ली।