#Intolerance: नेहरू की भांजी ने वापस लिया लौटाया हुआ पुरस्कार

नई दिल्ली (22 जनवरी): असहिष्णुता के खिलाफ अपने साहित्य अकदामी अवॉर्ड लौटाने वाले लेखकों में एक नयनतारा सहगल ने अपना अवॉर्ड वापस ले लिया है। गौरतलब है कि साहित्यकार कलबुर्गी हत्या और दादरी कांड जैसे मामलों के बाद देश में इनटॉलरेंस बढ़ने की बात कह 40 साहित्यकारों ने अपने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिए थे। इसमें जवाहर लाल नेहरू की भांजी सहगल उदय प्रकाश के साथ अवॉर्ड लौटाने वाले पहले साहित्यकारों में से एक थीं।

कौन हैं नयनतारा सहगल नयनतारा सहगल एक लेखिका हैं जो अंग्रेजी भाषा में लिखती है। इनका जन्म 10 मई 1927 को नेहरू गांधी परिवार में हुआ था। वे पहली भीरतीय महिला लेखिका हैं जिन्हें अंग्रेजी लेखन के लिए पहचान मिली। वे भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की बहन विजय लक्ष्मी पंडित की बेटी हैं। 

सहगल के अलावा नंद भारद्वाज ने भी लिया फैसला  राजस्थानी लेखक नंद भारद्वाज ने भी अपना अवॉर्ड वापस ले लिया है। नयनतारा सहगल ने बताया कि उन्हें अकादमी से एक चट्ठी मिली। जिसमें यह लिखा था कि अकादमी में पुरस्कार लौटाने को लेकर कोई नियम नहीं है। अकादमी पुरस्कार अपने पास नहीं रख सकती। इसलिए अकादमी पुरस्कार वापस भेज रही है। दोनों लेखकों ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में अपने इस फैसले के बारे में बताया है।

सहगल ने उस समय एक लाख रुपए का चेक भी लौटाया था। उन्होंने कहा कि इस पैसे का प्रयोग वो कल्याणकारी काम के लिए करेंगी। बता दें कि 88 साल की नयनतारा को साहित्य अकादमी पुरस्कार 1986 में आए उनके उपन्यास 'रिच लाइक अस' के लिए दिया गया था। 

साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि अवॉर्ड लौटाने वाले सभी 40 लोगों को चिट्ठी भेजी गई है। उनको भरोसा है कि और दूसरे लेखक भी अकादमी की चिट्ठी पर जवाब जरूर देंगे।