पाकिस्तान में उठने लगे सवाल, आतंकियों पर नवाज 'शरीफ' क्यों ?

नई दिल्ली (9 अक्टूबर): जब नवाज की शराफत की धज्जियां पाकिस्तान में उड़ीं तो वो एक्शन में आ गए। खुद नवाज की पार्टी से भी आवाजें आने लगीं कि आर्मी चीफ की मनमानी और आतंकी संगठनों को पालने के पीछे आखिर क्या मजबूरी है। ना सिर्फ राहिल शरीफ बल्कि आतंकी आकाओं हाफिज सईद और मसूद अजहर पर भी नवाज से जवाब मांगा जा रहा है। पाकिस्तान में पीएमएलएन के नेता राणा मोह्म्मद अफजल से संसद में नवाज से पूछा कि आखिर हाफिज जैसे लोगों को बढ़ने का मौका क्यों दिया जा रहा है ? क्यों उनके पर नहीं कतरे जाते ?

इस सबके बीच पाक डिफेंस एक्सपर्ट, आयशा सिद्दीका ने भी हाफिज के खिलाफ कहा कि पाक को आगे बढ़ने के लिए हाफिज जैसे लोगों को छुटकारा पाना जरूरी है। हाफिज और मसूद जैसे आतंक के आकाओं का विरोध तो हो रहा है, नवाज पर भी दबाव है। लेकिन इस वक्त में हाफिज और मौलाना अजहर को दरकिनार करना नवाज के लिए मुमकिन नहीं होगा।

इसकी कई बड़ी वजहे हैं... - पाकिस्तान में हाफिज को आतंकी नहीं माना जाता - हाफिज के संगठन जमात-उद-दावा की हैसियत सामाजिक संगठन की - हाफिज बाढ़ जैसी आपदाओं में मदद करता है - पाकिस्तान में उसका आतंकी मंसूबा सामने नहीं आता - पाक में सारे जलसे जमात-उद-दावा के तले करता है - मजहबी तकरीरों के जरिए हाफिज ने अपना कद बढ़ाया

पाकिस्तान में हाफिज का जो कद है वो काफी बड़ा है। उसकी वजह आर्मी और आईएसआई से उसकी नजदीकी होना भी है। ऐसे में अगर हाफिज के खिलाफ नवाज सरकार कोई एक्शन लेती है तो नवाज के खिलाफ लोग नाराज हो सकते हैं। ऐसे वक्त में हाफिज पर नवाज के नरम रुख का फायदा राहिल शरीफ उठा सकते हैं यानि नवाज के लिए दोहरी मुसीबत है।

पाक में शरीफ वर्सेज शरीफ में सबसे बड़ा दांव हाफिज और मसूद जैसे आतंकियों को होगा। वो जिस तरफ झुकेंगे बाजी उनके हाथ हो सकती है और भारत के खिलाफ जहर उगलकर वो पाकिस्तान में मसीहा की तरह होते जा रहे हैं, लेकिन अब उनके चेहरों से परतें उतरने लगी हैं। खुद पाक के अंदर से ही आवाज आ रही है, लेकिन सवाल ये कि आखिर आतंक के इन नासूर से कैसे पाकिस्तान बच पाएगा। ना तो ये राहिल शरीफ कर सकते हैं और ना ही नवाज शरीफ, क्योंकि इस वक्त दोनों एक-दूसरे में उलझे हैं।