नवाज को उखाड़ फेंकने पर अड़े इमरान, रैली को रोकने लिए 50 हजार जवान तैनात

नई दिल्ली ( 30 अक्टूबर ) : क्रिकेटर से नेता बने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेता इमरान खान ने 2 नवंबर को इस्लामाबाद बंद का ऐलान किया है। यह विरोध प्रदर्शन मौजूदा नवाज शरीफ की सरकार के कामों में पारदर्शिता की कमी के विरोध में है। शरीफ का नाम पनामा पेपर्स लीक में भी उछला था, जिसे लेकर ये विरोध है।

इस्लामाबाद में कर्फ्यू जैसे हालात इमरान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है। रैली को रोकने के लिए शरीफ सरकार ने 50 हजार जवान तैनात किए हैं और कर्फ्यू जैसा माहौल है। इस्लामाबाद पहुंचने वाले सारे रास्ते ब्लॉक कर दिए हैं और रोड पर कंटेनर रख दिए हैं। 

-पुलिस ने शनिवार को रावलपिंडी में प्रदर्शन कर रहे इमरान समर्थकों पर आंसू गैस के गोले दागे।  -रैली से पहले ही तहरीक-ए-इंसाफ के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।  -पुलिस ने इमरान खान के घर को घेर लिया है, ताकि बाहर निकलने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सके।

विरोध की वजह

इमरान खान 2014 में चार महीने तक इस्लामाबाद में ऐसा प्रदर्शन कर चुके हैं। ऐसे में शरीफ को डर है कि आंदोलन लंबा खिंचने पर उनके खिलाफ बने माहौल को हवा मिल सकती है। विरोध के लिए ऐसा वक्त चुना गया है, जब नए आर्मी चीफ की नियुक्ति भी लटकी हुई है, क्योंकि जल्द ही जनरल राहील शरीफ का कार्यकाल खत्म होने वाला है।

400 करोड़ का नुकसान

इमरान की रैली का असर पाक शेयर मार्केट पर पड़ रहा है। 20 अक्टूबर से अब तक शेयर मार्केट को 400 करोड़ का नुकसान हो चुका है। मार्केट में गिरावट के पीछे राजनीतिक अस्थिरता को बड़ी वजह मानी जा रही है। निवेशक इसी अस्थिरता से डरे हुए हैं। धार्मिक दलों के शामिल होने के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं।