नवरात्र: तीसरे दिन ऐसे करें चंद्रघंटा माता की पूजा

नई दिल्ली(23 सितंबर): नवरात्र का आज तीसरा दिन है। इस दिन माता चंद्रघंटा की पूजा होती है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग सोने के समान बहुत चमकीला है और इनके दस हाथ हैं।

- वे खड्ग और अन्य अस्त्र-शस्त्र से विभूषित हैं। सिंह पर सवार दुष्‍टों के संहार के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। इसके घंटे सी भयानक ध्वनि से अत्याचारी दानव-दैत्य और राक्षस कांपते रहते हैं।

- पूजा का समय 

- शनिवार को पूजा का समय सुबह 6 बजे से दिन के 10.55 बजे तक पूजा का मुहूर्त है। ऐसे भक्त जो नियमानुसार पूजा करते हैं वह सुबह 10.55 तक पूजा की शुरुआत कर सकते हैं। बाकि भक्त दिन भर पूजा कर सकते हैं।

- तीसरे दिन की पूजा का विधान भी लगभग उसी प्रकार है जो दूसरे दिन की पूजा का है। इस दिन भी आप सबसे पहले कलश और उसमें उपस्थित देवी-देवता, तीथरें, योगिनियों, नवग्रहों, दशदिक्पालों, ग्राम एवं नगर देवता की पूजा अराधना करें। फिर माता के परिवार के देवता, गणेश, लक्ष्मी, विजया, कार्तिकेय, देवी सरस्वती, एवं जया नामक योगिनी की पूजा करें फिर देवी चन्द्रघंटा की पूजा अर्चना करें। 

- चन्द्रघंटा की मंत्र - या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

- मां की उपासना का मंत्र  पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥