टोकरी में पूरे साल विश्राम करती हैं देवी, सिर्फ नवरात्रि में दे रही हैं दर्शन

नई दिल्ली (19 सितंबर): छत्तीसगढ़ के धमतरी में  मराठापारा में स्थित सैकड़ों साल पुराने मंदर माई मंदिर की एक खास परंपरा इसे बाकी मंदिरों से अलग करती है। मंदिर में स्थापित देवियां और देवता साल भर विश्राम करते हैं और केवल शारदीय नवरात्र में ही दर्शन देते हैं। 

-  इन देवी-देवताओं के नाम हैं- कंकालिन देवी, रिकछीन देवी, मढ़िया देव और लंगूर देव।

- दरअसल, ये सभी इस क्षेत्र के लोकदेवता हैं और क्षेत्र की परंपराओं के मुताबिक उनकी पूजा-अर्चना आज भी होती है।

- नवरात्र की पंचमी के दिन ज्योत (दीपक) जलाकर जंवारा बोया जाता है। उसी दिन देवी-देवता झांपी (टोकरी) से बाहर आते हैं।

- सभी देवी-देवताओं को विजयादशमी के दूसरे दिन वापस उन्हीं झांपियों में रख दिया जाता है।

- मंदर माई मंदिर की सेवा अभी पुजारी की चौंधी पीढ़ी के लोग कर रहे हैं।

- पुजारी राजकुमार ध्रुव ने बताया कि मंदिर लगभग 200 साल पुराना है। - मंदिर के द्वार पर शीतला माता का मंदिर है। कहा जाता है शीतला माता की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी।

- मंदिर में कंकालिन देवी समेत दुर्गा माता व अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं। - पुजारी राजकुमार ध्रुव ने बताया कि पांच दिनों तक पूजा-अर्चना के बाद विजयादशमी के दूसरे दिन विसर्जन शोभायात्रा निकाली जाएगी।

- इस दौरान रास्ते भर भक्त आस्था का बाना (एक प्रकार का नुकीला डंडा) लेते हैं।

- वे उस बाने को अपने शरीर के अलग-अलग अंगों में चुभोकर अपनी भक्ति का परिचय देते हैं।